



दरभंगा, देशज टाइम्स। दरभंगा बदल रहा है। इसका स्वभाव बदल रहा है। रंग बदल रहा है वहीं फितरत बदल रही है। लोग बेबस हैं। सरकार के पास देने लायक कुछ नहीं है। स्थानीय नगर निगम की सरकार सिस्टम को ताक पर खानापूरी कर रही है। पैसे की बर्बादी के बीच आम जीवन रेंग रहा है।
कहने को तो बहुत कुछ है मगर किससे कहें हम, कब तक यूं ही खामोश और सहते रहे हम यह सबसे बड़ा सवाल है। दरभंगा के अधिकारी यहां के कर्मी बस भारत मां को कर शर्मिंदा, ये उसकी कोख लजाए, इस दरभंगा की है बीमारी, ये दानव अत्याचारी. खून चूसकर जनता का, ये अपना राज चलाए। जो खाली रह गया इनका पेट, नरभक्षी भी बन जाएं।
धरती मां का सौदा कर, उसको भी नोच खाते ये इस दरभंगा की है बीमारी, ये भूखे भ्रष्टाचारी। माता पिता ने पढ़ा लिखाकर , तुमको अफसर बना दिया..आज देखकर लगता है , सबसे बड़ा एक गुनाह किया..रिश्वत लेने से अच्छा था ,भिक्षा लेकर जी लेते..मुह खोलकर मांगे पैसे , बेहतर होंठ तुम सी लेते.। हालात यही है, सिस्टम रो रहा है और आम आदमी हंस रहा है।







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