



दरभंगा, देशज टाइम्स। जिला परिवहन कार्यालय दलालों के चंगुल में है। अधिकारी कोई आएं, जिला प्रशासन की कमान भले कोई संभालें। छापेमारी हो। जूतम-पैजार हो मगर यहां से दलालों का कब्जा हटने वाला नहीं। दलाल की दबंगई ऐसी, डीटीओ कार्यालय के अंदर बैठकर खुलेआम लाइसेंस के नाम पर लोगों से मोटी रकम की वसूली कर रहा है। वहां उसके लिए अफसर की तरह कुर्सी लगाई आपको दिखेगी। यहां दलाल नियमित रूप से सुबह दस बजे पहुंचता है। शाम पांच बजे तक बैठता है।
फिर दलाली का खेल शुरू होता है। दलालों के माध्यम से हर माह सैकड़ों लाइसेंस व गाड़ियां के रजिस्ट्रेशन का काम होता है। एक से औसतन पांच हजार रुपए लिए जाते हैं। यानी महीने में उसकी काली कमाई 75 लाख के करीब होती है। इसमें सबका हिस्सा होता है। दलाल ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के नाम पर लोगों से आवेदन लेता है। फिर जल्दी के नाम पर बाइक के लिए चार से पांच हजार व तीनपहिया व चारपहिया के लिए आठ से दस हजार रुपए जबकि बड़े वाहनों के लिए बीस हजार रुपए तक में लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन को डील करता है। डीटीओ कार्यालय की फाइलों पर दलालों का संक्षेप में कोड लिखा रहता है। जिसे देखते ही कर्मी पहचान लेते हैं कि कौन सी फाइल किसकी है। कौन रुपए देने वाला और कौन रुपए देने वाला नहीं है। पैसा नहीं देनेवाले के कागज में कमी की बात कह लौटा देते हैं। सोलह-सत्रह नवंबर सत्रह को जिला परिवहन कार्यालय में गुरुवार का दिन था। धावा दल ने छापेमारी कर बारह दलालों को गिरफ्तार कर लिया। कई बड़े दलाल मौके से फरार हो गए।
मौके पर कार्यालय के अंदर कुर्सी पर बड़े दलाल बैठे हुए थे। इस कारण से उसकी पहचान नहीं हो पाई। हेरा-फेरी के आरोप में चतुर्थवर्गीय कर्मी विजय कांत झा को भी हिरासत में लिया गया था। यह कोई पहली घटना नहीं थी। दोपहर करीब 12 बजे प्रशिक्षु आईएएस विजय प्रकाश मीणा व सदर एसडीपीओ को नेतृत्व में छापेमारी की गई। अचानक हुई इस कार्रवाई से दफ्तर में हड़कंप मच गया। इस दौरान 12 संदिग्ध, चार कर्मी और एक जनरेटर संचालक को हिरासत में लिया गया। साथ ही साढ़े चार लाख रुपये की अवैध धनराशि भी जब्त की गई। छापेमारी में सैकड़ों की संख्या में पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन कार्ड भी मिले मगर हुआ क्या। दलालों की चांदी आज भी है कल भी थी और कल भी रहेगी।







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