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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

हक की लड़ाई तन्हा ही लड़नी होती है…सैलाब उमड़ता है जीत जाने के बाद..

घरेलू गैस सिलेंडर की डिलेवरी के वक्त उसे तौल कर ही लें। कारण, उसमें गैस की मात्रा कम हो सकती है। दरअसल, शहर में...

भरोसा दूसरों पर रखो तो गम दे जाती हैं, भरोसा ख़ुद पर रखो तो ताकत बन जाती हैं…

बैंकों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। न तो पुलिस को इसकी चिंता है न ही बैंककर्मियों को। दिनदहाड़े बैंक से निकलने वाली महिलाओं से...

नए किरदार आते जा रहे हैं, मगर नाटक पुराना चल रहा है

जहां डीएम व एसएसपी को मंडलकारा में जाने के लिए दो घंटों का बाहरी इंतजार करना पड़े उस देश की न्याय प्रणाली कैसी होगी...

असहाय पंगु विधवा कि ऐसें पेंशन पाबै छै, जे-जे पहिने खर्च करै छै पेंशन उहे उठाबै छै

देश आज कहां जा रहा है इसकी मिसाल अगर देखनी हो तो सरकारी दफ्तरों में, बैंक की कतारों में राशन की दुकानों पर देखिए।...
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यह पाप उन्हीं का हमको मार गया है सुशासन अपने घर में ही हार गया है

कहने भर को अब बिहार में सुशासन बचा है। साहेब आज जब से सरकार पांच राज्यों की बदलने लगी है नेताओं के सुर बदलने...

कांटा लगा हाय लगा …सच ही तो कहती थी सखियां फंसेगी तू इक दिन

 दरभंगा पुलिस को फिल्म समाधि का मशहूर गाना जरूर याद करना चाहिए। मैडम परेशान महकमा परेशान इंस्पेक्टर परेशान दारोगा परेशान संतरी परेशान चौकीदार परेशान...

बैठे हैं यमराज वहीं पर, नहीं सुरक्षा है जहां पर…

घर पर रखा धन सुरक्षित नहीं है। इसकी चोरी होने का डर बना रहता है। ऐसे में आप अपने पैसे बैंक में रखते हैं।...

ऐसा हंगामा न था जंगल में ए मेरे दोस्त… मुझको कहानियां न सुना शहर को बचा

स्कूल की व्यवस्था वहां का माहौल पढ़ाई लायक कम दिखने लगा है। स्कूल परिसर में जमकर मारपीट, हंगामा की खबरें लगातार विचलित कर रही...
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बहुत सुकून से रहते थे हम अंधेरे में फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से

अब बिजलियों का ख़ौफ़ भी दिल से निकल गया ख़ुद मेरा आशियां मिरी आहों से जल गया कोई बिजली इन ख़राबों में घटा रौशन करे ऐ अंधेरी...

कोतवाल को आकर खुद ही थाने में डांटे उलटा चोर, ज़माना रिश्वत का

साहेब अब हमारा शहर भी रिश्वतखोरों से भर गया है। यहां रिश्वतखोर दवा दुकान, रिश्वतखोर अधिकारी, रिश्वतखोर होटल, उस होटल के रिश्वतखोर वैटर, रिश्वतखोर...

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