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फ़रवरी, 12, 2026

दादा कहिन ( Deshaj Times Cartoon )

सुना है अब मैं पत्रकार हो गया हूं, दिख रही देश की तरक्की सारी क्योंकि मैं नेताओं का यार हो गया हूं

दरभंगा, देशज टाइम्स। पत्रकारिता को चौथा स्तम्भ कहा जाता है। देश को चलाने में पत्रकारों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। सरकार बनाने बिगाड़ने...

राजनीति का रंग भी बड़ा अजीब होता है, वही दुश्मन बनता है जो सबसे करीब होता है

अब हवाएं ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला, जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा चुनावी माहौल गर्म है, बयानबाजियों का दौर भी...

जान हथेली पर है साहेब,तुम भी इस शहर में बन जाओगे पत्थर जैसे,हंसने वाला यहां कोई न रोने वाला

शहर का भी दस्तूर वही जंगल वाला, खोजने वाले ही अक्सर खो जाते हैं। हमारे शहर का हाल यह है, सच्चाई और इमानदारी का...

हमारे जागने से नींद में उनकी खलल कैसे,सियासत को लहू पीने की लत है,वर्ना मुल्क में सब खैरियत है

कागज के इंसानों पर आग की निगरानी है, अंधी सत्ता के हाथों मासूमो को जान गवानी है. सवाल जहर का नहीं था, वो तो...
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बस यह मतलब आज तक समझ नहीं आया, जो गरीब के हक के लिए लड़ते हैं अमीर कैसे बन जाते हैं

हम यह नहीं सोचते कि घूमने कहां जाएंगें, हम तो यह सोचते है कि महीनें का आखिर कैसे बिताएंगे। एसी कार में घूमना तो...

मुझे पढ़ना सिखाने के लिए धन्यवाद, मेरा मध्याह्न भोजन गटक लेने के लिए धन्यवाद… मास्टर साहिब

शिक्षक समाज की सर्वाधिक संवदेनशील इकाई है. शिक्षक अपना काम ठीक तरह से नहीं करते- यह आरोप तो सर्वत्र लगाया जाता है. लेकिन यह...

तुमने दशकों लूटा है, अब शांत रहो ये नक्कालो, अच्छा करने वालों की, राहों में अड़चन ना डालो

शहर में पत्रकारिता के नाम पर जो चेहरे दिखते हैं उसमें पत्रकारिता के कीटाणु कितने हैं क्या उन्होंने कभी पत्रकारिता के एबीसी भी पढ़ा,...

चर्चा स्वच्छ भारत अभियान की, नामुमिन अब मुमकिन, जय बोलो झाड़ृृ के साथ फोटू खिंचाने वालों की

स्वच्छ भारत अभियान मोदी सरकार ने 2 अक्टूबर, 2014 को महान व्यक्ति महात्मा गांधी की 145 वीं जन्मदिन की सालगिरह पर शुरू किया गया...
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अब तो उतनी भी मयस्सर नहीं मय-ख़ाने में जितनी हम छोड़ दिया करते थे पैमाने में…तब भी चखेंगे तो

त्योहारों के हमारे परंपरावादी देश में होली ऐसा पर्व है, जो हरेक को चाहे-अनचाहे और जाने-अनजाने अपने कच्चे-पक्के रंग में सराबोर कर देता है।...

धम्म, धम्म,धम्म,धम्म…धम्म…धड़ाम,पानी के प्राण मछलियों में बसते हैं, आदमी के प्राण कहां बसते हैं…

कहा जाता है कि डॉक्टर भगवान के समान होता है। लोग उनके पास जिंदगी बचाने के लिए जाते हैं। मगर अब तो डॉक्टरों पर...

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