



सतीश चंद्र झा। सरकार और न्यायालय भले ही देश से भूख एवं कुपोषण दूर भगाने के लिए कृत संकल्पित हो लेकिन बिहार सरकार के बाल विकास परियोजना निदेशालय की ओर से जारी किए गए नित्य नए आदेश निर्देश के कारण बेनीपुर प्रखंड क्षेत्र में बच्चों का निवाला एक बार पुनः ठप पड़ने की प्रबल संभावना बन रही है।
बेनीपुर प्रखंड क्षेत्र में बाल विकास परियोजना अंतर्गत कुल 284 आंगनवाड़ी केंद्र संचालित हैं जहां प्रतिमाह लगभग 10 हजार नौनिहालों के साथ-साथ 30,000 लाभान्वितों को पका पकाया भोजन या सूखा राशन उपलब्ध कराया जाता रहा है।
इसके लिए सरकार की ओर से प्रतिमाह प्रत्येक आंगनवाड़ी केंद्रों को 19446 रुपए उपलब्ध कराई जाती है। इससे आंगनवाड़ी सेविका एवं सहायिका की ओर से प्रत्येक दिन केंद्र पर उपस्थित होने वाले 35 बच्चे को पका पकाया
भोजन एवं गर्भवती प्रस्तुति महिलाओं के साथ-साथ कुपोषित बच्चों की माताओं को सूखा राशन के रूप में प्रत्येक माह 15 तारीख को टेक होम राशन उपलब्ध कराई जाती है।
भोजन एवं गर्भवती प्रस्तुति महिलाओं के साथ-साथ कुपोषित बच्चों की माताओं को सूखा राशन के रूप में प्रत्येक माह 15 तारीख को टेक होम राशन उपलब्ध कराई जाती है।पिछले डेढ़ वर्षो में कोरोना संक्रमण के भय से आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन तो ठप ही था लेकिन गर्भवती एवं प्रसूति माताओं को सूखा राशन उपलब्ध कराई जाती थी, इसके लिए समुचित राशि सरकार की ओर से पोषाहार क्रियान्वयन समिति के खाते में हर माह उपलब्ध कराई जाती रही है।
इस बीच आंगनबाड़ी केंद्र का सुचारू संचालन प्रारंभ कर दिए जाने के बाद बाल विकास परियोजना के निदेशक द्वारा अक्टूबर माह से पोषाहार वितरण में नए प्रारूप को लागू किया गया है। इसके तहत चावल का उठाव बिहार राज्य खाद्य निगम के स्थानीय गोदाम से किया जाना है और शेष राशि कार्यान्वयन समिति के खाते में दिया जाना है।
पिछले माह राज्य खाद्य निगम को मात्र 132 क्विंटल चावल का आवंटन किया गया जबकि 284 केंद्रों को 179 किलो प्रति केंद्र के हिसाब से 508 कुंटल का आवंटन किया जाना था, फलस्वरूप अक्टूबर माह में चावल का उठाव नहीं हो सका पुनः नवंबर माह में चावल का उठाव नहीं होने के कारण नया आवंटन तो नहीं दी गई और विभाग की ओर से भी मात्र 32 लाख कश रुपए आवंटित की गई।
इससे कि वर्तमान बाजार भाव के अनुसार पोषाहार का वितरण संभव नहीं है । इस संबंध में पूछने पर सहायक गोदाम प्रबंधक अंशुमन राय 132 कुंतल चावल का आवंटन प्राप्त होने की बात बताते हुए कहा कि परियोजना द्वारा उठाव नहीं की गई हम तो मात्र उसके कस्टोडियन है।
दूसरी ओर सीडीपीओ लक्ष्मी रानी ने पूछने पर बताया कि चावल का उठाव आखिर कौन करेगा और इसका वितरण किस तरह होगा इसके संबंध में विस्तृत मार्गदर्शन की मांग जिला कार्यक्रम पदाधिकारी से की गई है।
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