



प्रशांत कुमार, कुशेश्वरस्थान। पंचायत में जहां शौचालय की जरूरत है, वहां तो शौचालय है नहीं पर जहां पहले से ही शौचालय है वहां पर शौचालय निर्माण कर, क्यों किया जा रहा सरकारी राशि का दुरुपयोग, वह भी बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए, यह सवाल लोग पूछ रहे हैं।
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सूत्र बताते है कि वर्ष 2022 में ही शौचालय निर्माण के नाम पर राशि की निकासी हुई। और, अब माध्यमिक विद्यालय केवटगामा में लगभग छह लाख की राशि से शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है।
इससे पूर्व विद्यालय प्रबंधन की ओर से शिक्षा विभाग से लगभग चार लाख की राशि से इससे पूर्व शौचालय निर्माण कराया जा चुका है। ठीक उसी शौचालय के बगल में ग्राम पंचायत भी शौचालय का निर्माण कर रहा है, वह भी बिना एनओसी लिए।
यह मामला तब संज्ञान में आया जब केवटगामा के प्रवीण यादव ने इसकी शिकायत लिखित रूप से पंचायती राज पदाधिकारी को किया। आवेदक श्री यादव ने बताया कि जहां पर योजनाओं पर कार्य करना चाहिए वहां किया नहीं जा रहा है।
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विद्यालय में पहले से ही शौचालय जब है तो वहां निर्माण करने की क्या आवश्यकता आ गई। यही शौचालय पंचायत में कहीं और किया जाता तो यहां की जनताओं को कम से कम खेत और सड़कों पर लौटा लेकर तो नहीं जाना पड़ता।
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कहने के लिए तो पूरा पंचायत खुले में शौच से मुक्त है। इसके बाबजूद सड़क किनारे लोग शौच करने के लिए मजबूर हैं।
पंचायत के लोगों के साथ ऐसा सौतेला व्यवहार आखिर क्यों किया जा रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि यहां की व्यवस्था में खोट है। सरकारी राशि का जरूरत के हिसाब से नहीं बल्कि अपने मर्जी से खर्च की जा रही है।
इस मामले में पंचायत सचिव सुबोध कुमार ने देशज टाइम्स टीम को बताया कि उक्त राशि पूर्व के पंचायत सचिव के हस्ताक्षर से निकासी की गई है। इसमें मेरी कोई भूमिका नहीं है।
पंचायती राज पदाधिकारी आबिद अख्तर बताते हैं कि आवेदन प्राप्त हुआ है। मामले की जांच कर दोषी लोगो पर कार्यवाई के लिए वरीय अधिकारी को लिखा जायेगा।
विद्यालय के प्रधानाध्यापक शंभु सदा बताते हैं कि विद्यालय में जितने शौचालय की जरूरत थी उतना बना हुआ है। ग्राम पंचायत की ओर से जिस सार्वजनिक शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए विद्यालय से एनओसी किसी की ओर से नहीं ली गई है।
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