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फ़रवरी, 11, 2026

Magazine

अंतिम संस्कार…Manoranjan Thakur के साथ

पूरा देश आज भी सोया है। सरकारें आज भी निश्चिंत हैं। सिस्टम शून्य भाव में है। आम औरतों की धड़कनें यूं ही धड़कती, मूंदती,...

अगर पत्रकारिता को कुछ हो गया तो…Manoranjan Thakur के साथ

उन बेजुबान मोमबत्तियों का क्या जो जंतर-मंतर पर पिघल गईं…असंख्य। उन नारों के शब्द गुम पड़ गए…अचानक। आंसू जो बहे, सूख गए…तत्काल। शोर जो...

अहाँ विनायक सिद्धिक दायक गणनायक विघ्नेष यौ…, हरितालिका तीज और गणेशोत्सव पर शिव नचारी, गणेशवंदना विशेष

गणेश वंदना अहाँ विनायक सिद्धिक दायक गणनायक विघ्नेष यौ अहाँ विनायक सिद्धिक दायक गणनायक विघ्नेष यौ मनकमना सब पूर करय छी हरियै सभक कलेश यौ।ऋद्धि सिद्धि सब...

ग़ज़ब ये है के गुनाहों को अंधेरा जांच रहा है, पढ़िए, जटिल दर्शन जांच का…!

इन दिनों देश में जांच का मौसम चल रहा है। बहुत-सी जांचें चल रही हैं। जांच करने वाले दिन-रात जांच करने में लगे हैं।...
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झंझारपुर के बहाने…’धीरे-धीरे’ Manoranjan Thakur के साथ

ललित- कर्पूरी स्टेडियम से बांस-बल्ले उखड़ रहे हैं। सांसें, पनाह मांग रही। ख्वाहिशें, दरकिनार पड़ी हैं। जो उम्मीद की लंबी-चौड़ी फेहरिस्त थी, कागजों के...

हनुमान अब मिथिला राज्य तो नहीं मांगोंगे…अमित शाह के झंझारपुर आने से पहले…Manoranjan Thakur के साथ

आज मिथिला के पास क्या नहीं है। मगर, हनुमान की चाहत आज भी अधूरी है। भले, अमित शाह सनातन धर्म और भारत-इंडिया के विवादों...

मत भूलो ए-हिंदी दिवस को महज औपचारिक समझने वालों…,हिंदी दिवस पर DeshajTimes.Com विशेष, Manoranjan Thakur के साथ

भाषा न बिगड़ती है न सुधरती है। वह सिर्फ बदलती है। इसमें नए विस्तार, नई चीजें,  नए उपकरण, नई तकनीक, नए संचार माध्यम जुड़ते...

भारत दैट इज इंडिया के अमृत मंथन में आत्मधिक्कार….हिंदी दिवस पर DeshajTimes.Com का विशेष अनुष्ठान Manoranjan Thakur के साथ

भारत दैट इज इंडिया के अमृत मंथन में आत्मधिक्कार व भाषा की हीनग्रंथी से बाहर निकलकर राष्ट्रीय अस्मिता का संवाहक, एक सूत्र वाक्य, ब्रह्म...
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Darbhanga समेत संपूर्ण Mithilanchal के हलधरों को यूं हीं मखाना GI Tag बेतुका लगता है…

केंद्र सरकार ने मिथिला के मखाना को जीआई टैग क्या दिया, इससे क्या लाभ मिला। किसान इससे कितने खुश हैं। टैग से उन्हें उनकी...

पढ़ना-लिखना सीखो…ए-मेरे दरभंगावासियों, Manoranjan Thakur के साथ

हर साल आठ सितंबर हमें याद दिलाता है, हम अनपढ़ हैं। लिख लोढ़ा पढ़ पत्थर हैं। भले, यह दिन साक्षरता को बढ़ावा देने, अनपढ़ता...

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