
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। व्यवहार न्यायालय परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत में करोड़ों के समझौते ने माहौल ही बदल दिया। लोग जुटे, विभिन्न कंपनियां जुटीं और आयोजन ने शनिवार को ऐसा रूप लिय कि हर तबके को कंपनियों की ओर से मिलती सुविधा के बीच समाधान निकलता चला गया। मौके पर राष्ट्रीय लोक अदालत में खंडपीठ के सामने कुल 992 समझौते सामने आए। इसमें 791 मामलें आपसी सहमति से सुलझ गए। कुटुंब अदालत के पचीस में से नौ, क्षति पूर्ति दावा के 29 में से चार, विभिन्न बैंकों के 274 में से
269, फौजदारी के 337 में से 215, दिवानी के छह में से तीन, बिजली के पचपन में से पचीस, बीएसएनएल के 266 में से 266 मामलों का ऑन द स्पॉट निष्पादन होने से कंपनियों ने भी राहत महसूसा। वहीं, बिजली, बीएसएनएल, बैंक व क्लेम मामलों में दो करोड़, नौ लाख, तीन हजार, दो सौ नौ रुपए पर पक्षकारों के बीच समझौता हुए।
डीएम ने किया शुभारंभ कहा, भरसक हो समझौते

मौके पर डीएम सह प्राधिकार के उपाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश बेनी माधव पांडेय, चतुर्थ एडीजे ब्रजेश कुमार मालवीय, पंचम अपर सत्र न्यायाधीश रूपेश देव, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रविशंकर प्रसाद ने सामूहिक रूप से दीप जलाकर लोक अदालत कार्यक्रम का उद्घाटन किया।
मौके पर मौजूद हजारों पक्षकारों को समक्षौता से मामले का निष्पादन होने के फायदे की चर्चा डीएम ने की। श्री सिंह ने कहा कि आज की अदालत से निष्पादित मामलें के पक्षकारों में से किसी एक पक्ष की नहीं बल्कि दोनों पक्ष की जीत होती है। इससे भारतीय समाज में समरसता बनी रहती है।
चाहे किसी भी प्रकार की मुकदमें क्यों न हो समक्षौता ही स्थाई समाधान है। मुकदमा लड़ते- लड़ते पक्षकारों का चेहरा मुरझा जाता है। खानदान दर खानदान वैमनस्यता बढ़ती जाती है। एक घटना के बाद हुई नुकसान की भरपाई मुकदमें से नहीं हो पाती है। अदालतों में मुकदमें का अंबार लग जाती है, लेकिन इस लोक अदालत से निष्पादित मामलों में अदालतों पर बोझ कम जाती है। इस अवसर पर
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संपत कुमार, एसीजेएम अनायत करीम, राजेश कुमार द्विवेदी, राजकुमार चौधरी, अजय कुमार, अक्षय कुमार सिंह, जावेद आलम, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी दीपांजन मिश्रा, प्रथम मुंसिफ विवेक चंद्र वर्मा, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी मनीष कुमार, शैलेंद्र कुमार सहित बैंक के अधिवक्ता सोहन कुमार सिन्हा, संजय कुमार झा, अरुण कुमार मिश्र, शिशिर कुमार झा, कृष्ण कुमार झा व पक्षकार व न्याय कर्मी मौजूद थे।
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