
आकिल हुसैन मधुबनी देशज टाइम्स ब्यूरो। बीजेपी शासित तीन राज्यों में चुनावी हार के बाद बीजेपी निराशा के दौर से गुजर रही है। आगामी लोकसभा चुनाव को देखते हुए मोदी सरकार ने सवर्णों का वोट लेने के लिए अंतिम सत्र के अंतिम दिन सवर्णों के लिए दस प्रतिशत आरक्षण देने का बिल पेश करती है। सरकार की मंशा स्पष्ट रहती तो पहले भी बिल सदन में लाया जा सकता था। दरअसल, मोदी सरकार सवर्णों का मत लेने के लिए आरक्षण लायी है। यह बात कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सह पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. शकील अहमद ने बेनीपट्टी में प्रेस वार्ता कर कही। डॉ. अहमद ने कहा कि सवर्णों को आरक्षण देने का काम 1992 में कांग्रेस सरकार ने भी की थी। जो सत्ता में आते ही की थी, लेकिन उस समय अधिवक्ता इंदिरा सहनी सुप्रीम कोर्ट गई। जहां सुप्रीम कोर्ट ने इसे खत्म कर दिया। 2014 में कांग्रेस के घोषणा पत्र में भी सवर्णों के लिए आरक्षण देने की बात कही गई थी। लेकिन, यूपीए सरकार सत्ता में नहीं आ पाई। डॉ. अहमद ने कहा कि गरीब सवर्णों के लिए लाए गए आरक्षण पर सरकार की मंशा साफ नहीं है। वो जानते है कि इस आरक्षण के खिलाफ कोई न कोई फिर सुप्रीम कोर्ट जाएगा। जब तक कोर्ट फैसला देगा, तब तक लोकसभा चुनाव में वोट ले लिया जाएगा। उन्होंने, कहा कि लोगों को ये सरकार दिग्भ्रमित कर वोट लेना चाहती है। क्योंकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण नहीं दिया जा सकता है।
उन्होंने राफेल खरीद की चर्चा करते हुए कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के तीन सवाल के जवाब अब तक मोदी नहीं दे पाए है। 70 साल के कंपनी को छोड़ 12 दिन पूर्व बने अनिल अंबानी के कंपनी को कैसे दिए गए, 126 लड़ाकू के जगह मात्र 36 ही खरीद क्यों किये गए और 526 करोड़ के जगह 1670 करोड़ कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि उस समय रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर थे, जो उस समय भारत में ही थे। फ्रांस से डील के समय पीएम मोदी ही उपस्थित थे। पीएम के साथ ओर कौन गया, इसकी जानकारी आरटीआई से भी मांगी गई, जिसका कोई जवाब नहीं दिया जा रहा है। पूर्व मंत्री ने उपस्थित सभी कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता को आगामी तीन फरवरी को गांधी मैदान भारी संख्या में आने की अपील की। मौके पर बेनीपट्टी विधायक भावना झा, कांग्रेस अध्यक्ष अवधेश सिंह, मिहिर झा, सुभाष झा ननकू, मीनू पाठक, कृष्ण चंद्र मालिक,नलिनी रंजन झा, विजय चैधरी, बैधनाथ झा, केसी पाठक सहित दर्जनों कांग्रेसी कार्यकर्ता मौजूद थे।
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