

आकिल हुसैन, मधुबनी देशज टाइम्स। भारत-नेपाल के बीच वर्षों से चली आ रही बेटी रोटी के संबंध में नेपाल सरकार की कुटनीति के कारण जयनगर-जनकपुर रेल परिचालन पर लग सकता है ग्रहण। हालांकि भारत सरकार की ओर से रेल परिचालन के लिए सारी तैयारी पूरी कर ली है। लगभग आठ सौ करोड़ की लागत से बनने वाली जयनगर-जनकपुर कुर्था नेपाल लगभग पैंतीस किमी तक बनने वाली बड़ी रेल लाइन निर्माण कार्य को निमार्ण एजेंसी की ओर से पूरा किया जा चुका है। सिर्फ सरकारी स्तर पर इसकी घोषणा करने की जरूरत है। जानकारी के अनुसार, वर्षों से चली आ रही भारत-नेपाल दोनों देशों के बीच बेटी रोटी के संबधों को और मजबूत करने के लिए भारत सरकार ने जयनगर जनकपुर नैरोगेज रेल लाइन को ब्राडगेज में परिवर्तन के लिए दोनों देशों के बीच 2010 में इकरार हुआ था। ब्रिटिश भारत सरकार की ओर से 1937 से चल रही नैरोगेज को 2011 में बंद कर बड़ी रेल लाइन निर्माण के लिए भारत सरकार ने निर्माण कार्य का जिम्मा इरकॉन इन्टरनेशनल प्रा.लि कंपनी को सौंपा, जिसे जयनगर जनकपुर होते हुए बर्दीबास तक 69 किमी बड़ी रेल लाइन निर्माण कार्य को पूरा करने का जिम्मा दिया गया। रेल परिचालन में विलम्ब को लेकर दोनों देशों के वरीय अधिकारी व विभिन्न मंत्रालय के मंत्रियों ने जयनगर जनकपुर का निरीक्षण कर रेल परिचालन अविलंब शुरु करने को लेकर सहमति भी बनी।
भारतीय सूत्रों की मानें तो बारह दिसंबर को विवाह पंचवी के मौके पर जयनगर-जनकपुर कुर्था रेल परिचालन शुरु होने की सूचना मिली थी। दोनों देशों के बीच रेल परिचालन के लिए सहमति बनने के बाद भी रेल का परिचालन नही होने से सामाजिक , व्यापारिक व सामरिक दृष्टिकोण से काफी क्षति हो रही है। इधर, नेपाल सूत्रों के अनुसार एक नेपाली अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित समाचार के अनुसार नेपाल सरकार की कुटनीति के कारण रेल परिचालन में और विलंब होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। नेपाल के संचार मंत्री गोकुल प्रसाद बासकोटा की ओर से दिए गए बयान में कहा है कि दो माह में ट्रेन परिचालन एक जोड़ी होगा, जिसे भारत सरकार से यूएस डालर राशि देकर ट्रेन खरीदने की बात कही गई है। इसके लिए नेपाल अधिकारी ने भारत सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराया है। वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री ने भी इस बात को स्पष्ट किया कि नयी ट्रेन उपलब्ध करायी जाए। नेपाल रेल के डायरेक्टर जनरल बलराम मिश्र ने भी स्पष्ट किया कि दो ट्रेन भारत से प्राप्त किया जाएगा। इसके लिए एक प्रस्ताव नेपाल की ओर से दो रेलवे शेड उपलब्ध कराने को लेकर भारत सरकार को पत्र लिखा गया है।


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