

दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। मिथिला की महिलाओं ने ही मिथिला पेंटिंग को जन्म दिया। वर्तमान में यह महिलाओं के सशक्तीकरण का जरिया बन गया है। आज जब मिथिला पेंटिंग से सजी ट्रेनें गुजरती हैं तो मिथिलावासी गौरवांवित हो जाते हैं। मिथिला के महिलाओं के हुनर की कद्र आज चहुंओर हो रही है। यह बात स्वयंसेवी संस्था डॉ. प्रभात दास फाउंडेशन के बैनर तले आयोजित निःशुल्क मिथिला पेंटिंग प्रशिक्षण शिविर का फीता काटकर उद्घाटन करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता भगवान लाल ठाकुर ने कही। श्री ठाकुर ने बताया कि माछ, मखान व पान की तरह ही मिथिला पेंटिंग यहां की संस्कृति से जुड़ी हुई है।

शहर के वार्ड दो, सुंदरपुर बेला, गेना पोखर के निकट उद्घाटित शिविर की प्रशिक्षिक शोभा देवी ने बताया कि मिथिला पेंटिंग के निपुण कलाकारों के लिए स्वरोजगार की राह खुल जाती है। अब तो और इंटरनेट का जमाना है। इसके जरिए विदेशों तक पेंटिंग, मिथिला पेंटिंग से सजी साड़ी, चादर की बिक्री हो रही है। प्रारंभिक दौर में थोड़ी कठिनाई के बाद कलाकार आसानी से प्रसिद्धि पा जाते हैं। उद्घाटन कार्यक्रम का संचालन फाउंडेशन के अनिल कुमार सिंह ने किया। मौके पर शिवानी कुमारी, अमिषा कुमारी, निधि कुमारी, अंजली कुमारी, अमृता कुमारी,पल्लवी कमारी, सुप्रिया कुमारी, आरती देवी, श्वेता देवी, निभा देवी, ममता देवी, पूनम देवी, रीतू सिंह, सोनी सिंह समेत अन्य मौजूद थी।



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