
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह की अध्यक्षता में समाहरणालय अवस्थित बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर सभागार में खसरा-रूबैला टीकाकरण अभियान के लिए मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। मौके पर डीएम ने कहा कि पंद्रह जनवरी से पूरे जिले में खसरा-रूबैला टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इसमें नौ माह से पंद्रह वर्ष तक के सभी बच्चों का टीकाकरण किया जाएगा। यह अभियान प्रथम दो सप्ताह तक सरकारी व निजी विद्यालयों, मदरसा, मकतब समेत अन्य जगहो पर चलाया जाएगा। अगले दो सप्ताह तक आंगनबाड़ी केंद्रों, ईंट-भट्ठा, घुमंतु आबादी के बीच इय अभियान चलाया जाएगा। पांचवें सप्ताह में पुनः छुटे हुए बच्चों का टीकाकरण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर किया जाएगा। उन्होनें बताया कि इस अभियान में मीडिया की सकारात्मक भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। चूंकि अभियान के दौरान कई बार लोगों में भम्र की स्थिति उत्पन्न होती है, ऐसी परिस्थिति में मीडिया की ओर से अभियान से संबंधित विशेष जागरूकता से संबंधित खबरें प्रकाशित होने पर जन समुदाय अभियान के प्रति प्रेरित होगें। विश्व स्वास्थ्य संगठन के चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. वासवराज ने बताया कि खसरा एक संक्रामक बीमारी है जो खांसने व छूने से भी फैलता है। इसमें सर्वप्रथम बुखार, शरीर पर निशान आदि दिखाई देने लगते है। रूबैला की शुरूआत जर्मनी से हुई थी, इसीलिए इसे जर्मन मिजल्स भी बोला जाता है। गर्भवती महिलाओं को खसरा-रूबैला से पीड़ित होने पर बच्चों को दिव्यांगता तथा मृत्यु का भी खतरा होता है। डॉ. ओम प्रकाश ने बताया कि यह बहुत घातक बीमारी है। हाल ही में एक बच्चे को छोटी माता के नाम से जानी जानेवाली यह बीमारी हुई व डॉक्टर की सलाह का पालन नहीं करने पर उस बच्चे की मृत्यु हो गयी। इस पर दुख व्यक्त करते हुए डॉ. ओमप्रकाश ने बताया कि खसरा-रूबैला से प्रभावित होने पर बच्चों की रोग-प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है।
इससे निमोनिया, डायरिया होने पर बच्चे की मृत्यु हो सकती है। प्रत्येक पांच मिनट पर विश्व में एक बच्चे की मृत्यु इस कारण से होती है। उन्होनें मीडिया के प्रतिनिधियों से आग्रह किया कि खसरा-रूबैला टीकाकरण को सफल बनाएं वहीं किसी भी प्रकार के अफवाह को फैलने न दें। यूनिसेफ के चिकित्सा परार्मशी शशिकांत सिंह ने बताया कि बिहार में चार करोड़ से अधिक बच्चों को तथा दरभंगा में 14,58,016 बच्चों को इस टीकाकरण अभियान में शामिल करने का लक्ष्य है। सिविल सर्जन डॉ. डीके मिश्र ने बताया कि इस अभियान के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए जिले के सभी विद्यालयों में शिक्षकों, शिक्षिकाओं, प्रधानाध्यापकों, आंगनवाड़ी सेविकाओं,आशा, एएनएम व चिकित्सकों को प्रशिक्षित किया गया है। पूरे अभियान की माइक्रो प्लानिंग की गई है। जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. एके मिश्रा ने बताया गया कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित व प्रभावी है, जो पिछले चालीस वर्षों से दुनिया भर में दिया जा रहा है। हमारे देश में निजी चिकित्सक द्वारा यह टीका पिछले कई वर्षों से बच्चों को दिया जाता रहा है। वर्त्तमान में यह टीका 149 देशों दिया जा रहा है। डीएम डॉ. सिंह ने सभी अभिभावकों से अपील की गई कि यह हमारी इस पीढ़ी तथा अगली पीढ़ी का प्रश्न है। खसरा-रूबैला से मुख्यतः नौ महीने से पंद्रह साल के बच्चे प्रभावित होते है। गर्भवती महिला के बच्चे को इससे अंधापन, बहरापन, दिमाग तथा दिल की बीमारी हो सकती है तथा बच्चे की जान भी जा सकती है। जिलाधिकारी ने सभी से अपील की कि इस अभियान में बढ़-चढ़ कर शामिल हों, किसी भी प्रकार के अफवाह से दूर रहें, अपने नौ माह से 15 साल के बच्चे को इसका टीका लगवाएं व खसरा-रूबैला को जड़ से मिटाने में अपना सहयोग करें। उन्होनें मीडिया के प्रतिनिधियों से अपील की कि इसका प्रचार-प्रसार करें। अंत में डीएम ने सभी संबंधित विभागों विशेष कर शिक्षा विभाग को इसकी माइक्रो प्लानिंग का निदेश देते हुए सधन्यवाद इस मीडिया कार्यशाला का समापन किया। कार्यशाला में जिला स्थापना पदाधिकारी रामाश्रय प्रसाद, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा-सह-जिला जन संपर्क पदाधिकारी रवि शंकर तिवारी, डीपीओ (आईसीडीएस) अलका अम्रपाली, अवर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार, डीपीएम (जीविका), विशाल सिंह, केयर इण्डिया से श्रद्धा व अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
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