
दरभंगा, देशज टाइम्स ब्यूरो। लनामिवि के वीसी प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की शुरूआत प्राथमिक शिक्षा के करनी होगी। यह बात गुरुवार को यूनिसेफ व दूरस्थ शिक्षा निदेशालय की ओर से आयोजित संयुक्त अंडरस्टेन्डिग सेल्फ पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। कहा कि इस तरह के कार्यशाला युक्त शिक्षकों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। शिक्षा के क्षेत्र में नित्य नए प्रयोग हो रहे हैं। इसकी जानकारी हर हमेशा शिक्षकों को होनी चाहिए। गुणवतापूर्ण शिक्षा समय की पुकार है। इसके लिए प्राथमिक रूप से लेकर उच्च स्तर तक प्रयास होने चाहिए। वीसी प्रो. सिंह ने कहा कि समय की पुकार है कि शिक्षक अपनी पुरानी सोच में परिवर्तन लाएं। नई तरीके से अध्ययन-अध्यापन करें। अगर सोच में परिवर्तन नहीं लाएंगें तो इस भूमंडलीकरण के दौर में यहां के छात्र

प्रतिस्पर्धा से सफल नहीं हो पाएंगें। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान दिया कि वे छात्रों में चरित्र निर्माण हो इस दिशा में भी सार्थक प्रयास करें। कहा कि शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सत्त प्रयास करने पर जोर दिया। उन्होनें कहा कि व्यक्ति को ’स्व’की पहचान होनी आवश्यक है। हम अधिकतर दूसरों की चिंता करते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला में विभिन्न विषयों के शिक्षक हैं। ऐसे में, आपसी सहयोग से उन्हें सीखने में अधिक सुविधा होगी। वे शिक्षा की गुणवता को दिशा में सोच विकसित कर सकेगें। बड़ौदा विश्वविद्यालय के पूर्व प्राध्यापक प्रो. थामस वाडाया ने कहा कि इस विश्वविद्यालय के शिक्षक काफी प्रतिभावान हैं। आवश्यकता है उनकी क्षमता में लगातार विकास हो।

इसओर प्रयास होते रहना चाहिए। प्रो. बडाया ने स्व पर अपने विचार प्रकट किए। कहा कि हमें खुद पर सोचने की आवश्यकता है दूसरों पर नहीं। परिचायात्मक सत्र् के बाद उन्होंने ’स्व’को पहचानने की दिशा में प्रायोगिक पहलुओं पर चर्चा की। डॉ. एस.ए मोइन ने कहा कि बिहार में लगातार शिक्षा में सुधार होता रहा है। लेकिन अभी भी सुधार की काफी आवश्यकता है। शिक्षकों पर काफी जिम्मेदारी है। इस अनुरूप शिक्षकों को अपना व्यवहार करना चाहिए। आगत अतिथियों का स्वागत दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के निदेशक डॉ. सरदार अरविंद सिंह ने किया। वहीं धन्यवाद ज्ञापन प्रो. विनय कुमार चौधरी ने किया। मंच संचालन अखिलेश कुमार मिश्र ने किया।




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