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फ़रवरी, 19, 2026
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संदीप फाउंडेशन के निदेशक पर एफआईआर

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संदीप फाउंडेशन के निदेशक पर एफआईआर आकिल हुसैन मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो। व्यवहार न्यायालय मधुबनी के अधिवक्ता अजय कुमार यश के दायर परिवाद पत्र के आलोक में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी ने संज्ञान लेते हुए संदीप फाउंडेशन के निदेशक संदीप झा पर नगर थाना में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। इस मामले में नगर थाना में एफआईआर 435 दर्ज किया गया है। अधिवक्ता अजय यश की ओर से अपने परिवाद पत्र संख्या 878/18 में संदीप झा, रहिका के सीओ व मधुबनी नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी जटाशंकर झा को नामजद करते हुए अपने परिवाद पत्र में उल्लेख किया। जानकारी के अनुसार, जिला मुख्यालय,मौजा चकदह,थाना संख्या-33, खेसरा संख्या 4775, 4776, 4777, 4778 व 4780 है। इस भूमि पर भूमाफिया व सफेदपोश से संरक्षण में केसरे हिंद की जमीन की खरीद-बिक्री का खेल किया गया है। मधुबनी सिविल कार्ट के अधिवक्ता अजय यश की ओर से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के कोर्ट में परिवाद संख्या-878/18 दायर किया गया। इसमें बताया गया कि केसरे हिंद जमीन से संबंधित सभी प्रकार के कागजात उनके पास उपलब्ध है। रहिका अंचल कार्यालय की मिलीभगत से केसरे हिंद जमीन को दरभंगा राज का जमीन बताकर किसा व्यक्ति को पूर्व लीज पर दिया गया। इसके बाद संदीप झा की ओर से केसरे हिंद जमीन को रहिका अंचल प्रशासन की मिली भगत से जमीन की जमाबंदी संख्या 790 कायम कर दिया गया। संदीप फाउंडेशन के निदेशक पर एफआईआर

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इसके बाद नगर परिषद प्रशासन की ओर से उक्त व्यक्ति के नाम होल्डिगं संख्या 384 कायम कर दिया जाता है। जहां अजय यश ने परिवाद में बताया कि उनकी ओर से जब आवेदन नगर परिषद को दिया जाता है तो उक्त फर्जी होल्डिगं संख्या को निरस्त कर दिया जाता है। वहीं, नगर परिषद कार्यपालक पदाधिकारी को मेल में लेकर उक्त व्यक्ति की ओर से बिना भवन का नक्सा पास कराए ही कार्यपालक पदाधिकार को मेल में लेकर उक्त जमीन पर व्यवसायिक भवन का निर्माण करा लिया है। परिवाद में बताया गया है कि उक्त भूमि पर भवन निर्माण से संबंधित आवेदन नगर प्रशासन को दिया जाता है, तो भवन तोड़ने के लिए मात्र दिखावा के लिए पत्र लिखा गया, परंतु वह अवैध भवन आज भी है। उक्त भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने की दिशा में नगर प्रशासन की ओर से आज तक कोई कार्रवाई नही की गई। परिवाद में अजय ने बताया है कि उक्त भूमि केसरे हिंद की है व इसे किसी व्यक्ति के नाम नहीं किया जा सकता है। इसके बाबजूद धोखाधड़ी कर फर्जी तरिके से जालसाजी कर सरकारी संपत्ति का दुरूपयोग व गबन करने की नीयत से सारा कारनामा किया गया है। इधर, नगर थानाध्यक्ष ने बताया है कि प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है।

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