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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश भर की पंचायतों को नेशनल डेयरी योजना से जोड़ने का फैसला लिया है। इसके लिए दो लाख सहकारिता समिति बनायी जायेगी।मंत्रिमंडल की बैठक में तय किया गया है कि सरकार सहकारी समितियों को मजबूत करेगी। विभिन्न उद्देश्य के लिये अगले पांच साल में दो लाख प्राथमिक कृषि सहकारी साख समिति (पीएसी), डेयरी, मत्स्य सहकारी समितियां गठित करने का लक्ष्य रखा गया है।
मोदी कैबिनेट ने सिंकुलना टनल के निर्माण को भी मंजूरी दी। इससे लद्दाख के लिए ऑल वेदर रोड कनेक्टिविटी मिल जाएगी. इसकी लंबाई 4.8 किलोमीटर होगी. 1600 करोड़ का खर्चा होगा।
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इससे सैन्य बलों की जमीनी मूवमेंट बढ़ेगी। आईटीबीपी चीन सीमा की निगरानी के लिए सात न्यू बटालियन बनाएगा।इसके साथ ही एक ऑपरेशनल बेस बनाया जाएगा। इसमें 9 हजार 400 जवान और तैनात होंगे।- Advertisement -
कैबिनेट की बैठक में देश के सामरिक महत्व के उत्तरी सीमावर्ती इलाकों के विकास की केंद्र पोषित वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम काे भी मंजूरी दी गयी। अनुराग ठाकुर ने बताया कि वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम को वित्त वर्ष 2022-23 से 2025-26 के दौरान लागू किया जायेगा।
इसके लिये 4800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2500 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जायेगा। यह देश की उत्तरी सीमा के सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण है। इससे इन सीमावर्ती गांवों में सुनिश्चित आजीविका मुहैया करायी जा सकेगी, जिससे पलायन रोकने में मदद मिलेगी।इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुल 19 जिलों के 2966 गांवों में सड़क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। यह बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम से अलग होगा। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
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इसके लिये 4800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसमें 2500 करोड़ रुपये सड़कों के निर्माण पर खर्च किया जायेगा। यह देश की उत्तरी सीमा के सामरिक महत्व को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण है। इससे इन सीमावर्ती गांवों में सुनिश्चित आजीविका मुहैया करायी जा सकेगी, जिससे पलायन रोकने में मदद मिलेगी।इसके साथ ही सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी। लद्दाख, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुल 19 जिलों के 2966 गांवों में सड़क और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा। यह बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम से अलग होगा। इसका पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करेगी।
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