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फ़रवरी, 20, 2026
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Madhubani के सौराठ में विद्यापति कला उत्सव, पद्मश्री का मार्गदर्शन, शिल्पनगरी Bhagalpur की तालनृत्य, टेराकोटा की कलाकृति और विद्यापति की गाथा…

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मुख्य बातें: कला के विविध आयामों को प्रश्रय देने को लेकर लगातार प्रयास जारी : निदेशक, मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ के बहुउद्देशीय सभागार में दो दिवसीय विद्यापति कला उत्सव 2023 का हुआ आगाज, विद्यापति की रचनाओं की प्रस्तुति ने बांधा समा, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त विभा दास की ओर से पेपर मेसी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शरद कुमार की ओर से टेराकोटा में एवं राज्य पुरस्कार प्राप्त रामबाबू पंडित द्वारा उनकी कला से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई

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समीर कुमार मिश्रा, मधुबनी, देशज टाइम्स ब्यूरो। कला संस्कृति एवं युवा विभाग बिहार सरकार के तत्वावधान में गुरुवार को मिथिला चित्रकला संस्थान, सौराठ के बहुउद्देशीय सभागार में दो दिवसीय विद्यापति कला उत्सव 2023 का शुभारंभ दीप (The story of Vidyapati Art Utsav in Saurath, Madhubani…) प्रज्वलित कर किया गया।

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जानकारी के अनुसार, उक्त समारोह के प्रथम दिन कई कार्यक्रम आयोजित हुए। आरंभ में रंगनाथ दिवाकर, कमलानंद झा और प्रो. इंदिरा झा की ओर से विद्यापति के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर सारगर्भित प्रकाश डाला गया। श्वेता भारती ग्रुप तालनृत्य संस्थान, भागलपुर की ओर से नृत्य की सुंदर प्रस्तुति की गई।

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गायन में सीताराम सिंह ने जहां विद्यापति की रचनाओं की सुंदर प्रस्तुति से श्रीताओं का मन मोह लिया। वहीं, डॉ. रंजना झा ने अपने सुरीले स्वर से समा बांध दिया। इस अवसर पर मिथिला चित्रकला संस्थान में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त  विभा दास की ओर से, पेपर मेशी में राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शरद कुमार की ओर से एवं टेराकोटा में राज्य पुरस्कार प्राप्त रामबाबू पंडित की ओर से उनकी कला से संबंधित प्रदर्शनी लगाई गई और कला के विविध आयामों के बारे में लोगों की व्याख्यापित जानकारी दी गई।

समारोह में उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए अपने स्वागत भाषण में मिथिला चित्रकला संस्थान के निदेशक वीरेंद्र प्रसाद की ओर से विद्यापति कला उत्सव के मनाए जाने में सूबे के कला संस्कृति एवं युवा विभाग के मंत्री जितेंद्र कुमार राय एवं अपर मुख्य सचिव कला संस्कृति एवं युवा विभाग, हरजोत कौर बम्हरा को प्रेरणा श्रोत बताया। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार द्वारा कला के विविध आयामों को प्रश्रय देने का काम लगातार जारी है।

इस परिप्रेक्ष्य में यह समारोह आगे भी मनाया जाएगा और क्षेत्र के विभिन्न कलाओं से संबद्ध कलाकारों की उपलब्धियों को रेखांकित किया जाएगा। उपस्थित श्रोताओं को संबोधित करते हुए अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कमलानन्द झा ने कहा कि विद्यापति का चिंतन व मनन अभी तक मात्र श्रृंगार एवं भक्ति के परिप्रेक्ष्य में हुआ है। उनकी पदावली में सामाजिक सरोकार की चिंता विलक्षण है।

उन्होंने कहा कि विद्यापति ने अपनी रचनाओं में मिथिला में व्याप्त दरिद्रता और आभाव का जीतना वर्णन किया है वह अन्यत्र नहीं मिलता। उनकी पदावली में “स्त्री भय जनमय जनु कोई” और “परवश जनु हो हमर पियार” जैसे छंदों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यापति की रचना वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप) के साथ साथ प्रेम में साहस का भी वर्णन करती है, जो अद्वितीय है।

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वहीं, प्रो. इन्दिरा झा ने विद्यापति की रचनाओं में मैथिली के साथ साथ संस्कृत साहित्य का भी उल्लेख किया और विद्यापति की रचनाओं के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाने की आवश्यकता पर बल दिया।

समारोह के सफल आयोजन के लिए सलाहकार समिति के सदस्यों इंद्रभूषण रमण ऊर्फ बमबम, ऋषि वशिष्ठ, महेंद्र नारायण राम, प्रो. इन्दिरा झा एवं डॉ. अभिषेक कुमार की ओर से समारोह की सफलता का श्रेय क्षेत्र के सभी कलाकारों को देते हुए उनका आभार प्रकट किया गया।

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कार्यक्रम के मार्गदर्शन का कार्य पद्मश्री बउआ देवी और पद्मश्री दुलारी देवी ने किया। संयोजन प्रतीक प्रभाकर की ओर से और आयोजक मंडल के सदस्यों के रूप में संजय कुमार जायसवाल, डॉ रानी झा,सुरेंद्र कुमार यादव, दिलीप झा, रूपा कुमारी, विकास कुमार मंडल द्वारा सक्रिय भूमिका निभाई गई।

स्वागत गान सुनयना ठाकुर और अंजना ठाकुर ने किया और मंच का संचालन डॉ. अभिषेक कुमार के साथ दुर्गेश मंडल और सोनालिका कुमारी की ओर से किया गया। इस मौके पर शांति देवी, शिवन पासवान, अरहुलिया देवी, आशा देवी,कल्पना सिंह, विनीता झा, विनोद कुमार, उदय जायसवाल, भोलानंद झा,ज्योति रमण झा, सुभाष चंद्र सिनेही,बासंती मिश्रा,सुरेंद्र पासवान, बिंदा देवी, छाया मिश्रा, पिंकी कुमारी सहित जिले के अन्य गणमान्य लोग उपस्थित थे।

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