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Araria News: पेट की आग बनाम चूल्हे की आंच! मात्र ₹3300 महीने पर कैसे हो गुजारा? स्कूल रसोइयों ने किया हड़ताल का ऐलान

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Araria News: पेट की आग बनाम चूल्हे की आंच! मात्र ₹3300 महीने पर कैसे हो गुजारा? स्कूल रसोइयों ने किया हड़ताल का ऐलान

आवेश आलम। Araria News: जो हाथ स्कूलों में बच्चों के लिए निवाला पकाते हैं, वही हाथ अब अपनी मांगों के लिए मशाल उठाने को तैयार हैं। अररिया में स्कूल रसोइयों ने अपनी दयनीय स्थिति के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए देशव्यापी हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है।

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Araria News: क्या हैं रसोइया यूनियन की प्रमुख मांगें?

बिहार राज्य विद्यालय रसोईया यूनियन (एटक) की अररिया जिला इकाई ने 12 फरवरी को होने वाली देशव्यापी आम हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है। इसके लिए यूनियन द्वारा चलाया गया एक सप्ताह का ‘रसोइया संपर्क अभियान’ रविवार, 11 फरवरी को समाप्त हो गया। इस अभियान के तहत यूनियन के सदस्यों ने जिले के विभिन्न स्कूलों का दौरा कर रसोइयों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया और हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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रसोइयों की सबसे बड़ी पीड़ा उनका मानदेय है। उन्हें मध्यान्ह भोजन योजना के तहत खाना पकाने के लिए हर महीने मात्र 3300 रुपये दिए जाते हैं, और यह राशि भी साल के केवल 10 महीनों के लिए ही मिलती है। इस महंगाई के दौर में इतनी कम राशि में परिवार का भरण-पोषण करना लगभग असंभव है। अपनी इन्हीं समस्याओं को लेकर रसोइया लंबे समय से संघर्ष कर रही हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।

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अभियान में दिखी एकजुटता, तैयारी पूरी

केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और स्वतंत्र संगठनों के आह्वान पर हो रही इस देशव्यापी हड़ताल में रसोइया अपनी मांगों का पर्चा भी जारी करेंगी। अररिया जिला कमेटी के इस संपर्क अभियान को सफल बनाने में चंद्रिका सिंह चौहान, नारद पासवान, सुनील, पवन, बेचन प्रसाद सिंह, लक्ष्मी, और रघुनंदन समेत कई अन्य सक्रिय सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उनकी एकजुटता ने इस अभियान को मजबूती प्रदान की।

यूनियन की बिहार राज्य सचिव कामायनी ने भी तैयारी बैठक में हिस्सा लेकर अभियान को बल दिया और कहा कि यह संघर्ष केवल मानदेय का नहीं, बल्कि सम्मान का भी है। उन्होंने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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