



Drug Addiction: समाज के लिए कैंसर बनता यह चलन
आवेश आलम अररिया। Drug Addiction: नसों में दौड़ते खून की जगह जब ज़हर दौड़ने लगे, तो समझ लीजिए कि एक पूरी पीढ़ी बर्बादी की चौखट पर खड़ी है। बिहार के सीमांचल में आजकल कुछ ऐसा ही खौफनाक मंजर देखने को मिल रहा है, जहां पार्कों और सड़कों के किनारे पड़ी इस्तेमाल की हुई सुइयां एक भयानक भविष्य की ओर इशारा कर रही हैं। यह एक ऐसी लत है जो युवाओं को दीमक की तरह अंदर ही अंदर खोखला करती जा रही है।
अररिया, कटिहार, पूर्णिया से लेकर किशनगंज और बारसोई तक, सीमांचल का शायद ही कोई ऐसा इलाका हो जहां यह जानलेवा नशा अपनी पकड़ नहीं बना रहा है। सुबह की सैर पर निकले लोगों को या पार्कों में खेलने गए बच्चों को अक्सर लावारिस पड़े इंजेक्शन और सुइयां दिख जाती हैं। यह इस बात का सबूत है कि हमारी युवा पीढ़ी किस तेजी से इस दलदल में धंसती जा रही है। यह नशाखोरी युवाओं को शारीरिक रूप से तो कमजोर कर ही रही है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। साथ ही उन्हें मानसिक रूप से भी गुलाम बना रही है, जिससे उनका भविष्य अंधकारमय हो रहा है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यह है कि कैंसर की तरह समाज में फैल रही इस समस्या पर सरकार और स्थानीय प्रशासन की नजर क्यों नहीं पड़ रही है? क्या पूरा तंत्र इस बात से अनभिज्ञ है कि उनके क्षेत्र के युवा नसों में जहर उतारकर अपनी जिंदगी खत्म कर रहे हैं? या फिर यह चुप्पी किसी बड़ी सांठगांठ का हिस्सा है? ये ऐसे सवाल हैं जो हर जागरूक नागरिक के मन में कौंध रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि यह कोई सामान्य नशा नहीं है, बल्कि सीधे नसों में लिया जाने वाला ड्रग्स है जो कहीं ज्यादा खतरनाक और जानलेवा होता है। अगर सरकार और प्रशासन वाकई इस मामले में संलिप्त नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल प्रभाव से ऐसी नशीली दवाइयों की बिक्री पर रोक लगानी चाहिए और इसे बेचने वाले गिरोहों पर कठोर से कठोर कार्रवाई करनी चाहिए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। अगर समय रहते इस पर काबू नहीं पाया गया, तो हम एक पूरी पीढ़ी को इस नशे की आग में झुलसते हुए देखने को मजबूर होंगे।



