

Sanitary Pad Bihar: अंधेरों को चीरकर एक नई सुबह लाई है भोजपुर की यह कहानी, जहाँ एक महिला ने सिर्फ अपने गाँव नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए स्वच्छता और स्वावलंबन का नया अध्याय लिखा है।
Sanitary Pad Bihar: भोजपुर की ‘पैड वाली मुखिया’ ने बदली ग्रामीण महिलाओं की तकदीर
भोजपुर में Sanitary Pad Bihar पहल: एक नई क्रांति की शुरुआत
बिहार के भोजपुर जिले में ‘पैड वाली मुखिया’ के नाम से मशहूर एक दूरदर्शी महिला ने पंचायत स्तर पर सैनिटरी पैड के निर्माण का कार्य शुरू कर एक अनुकरणीय मिसाल पेश की है। इस पहल ने न केवल कई स्थानीय महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार प्रदान किया है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मात्र 23 रुपये की किफायती दर पर सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाले सैनिटरी पैड उपलब्ध कराकर, उन्होंने ग्रामीण महिलाओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता को सुलभ बनाया है। यह कदम महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी प्रयास है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस परियोजना से जुड़कर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो रही हैं और समाज में अपनी पहचान बना रही हैं। यह सिर्फ पैड निर्माण नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की शुरुआत है, जो ग्रामीण परिवेश में महिलाओं के जीवन को नई दिशा दे रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
ग्रामीण स्वच्छता और आत्मनिर्भरता की राह
मुखिया की यह पहल न केवल आर्थिक रूप से पिछड़ी महिलाओं के लिए रोजगार का अवसर बनी है, बल्कि इसने ग्रामीण स्वच्छता के मानकों को भी ऊपर उठाया है। मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति बनी भ्रांतियों और झिझक को दूर करने में भी यह परियोजना सहायक सिद्ध हो रही है। उनकी यह दूरदर्शिता और अथक प्रयास लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस तरह की सामुदायिक स्तर की पहलें सामाजिक बदलाव की नींव रखती हैं और यह दर्शाती हैं कि कैसे स्थानीय नेतृत्व बड़े सामाजिक सुधारों को जन्म दे सकता है। यह दर्शाता है कि एक व्यक्ति का संकल्प समाज में कितना बड़ा सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।






