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फ़रवरी, 17, 2026
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Aurangabad News: 10 हजार की रिश्वत में फिसल गईं हजारों की नौकरी? अंचल का बाबू पहुंचा जेल, पढ़िए कैसे बिछाया गया जाल और गिरफ्तारी का श्लोक?

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Aurangabad News: जब ईमान की चादर पर लालच का दाग लग जाए, तो समझिए सरकारी कुर्सी की गरिमा तार-तार हो गई। औरंगाबाद के हसपुरा अंचल में कुछ ऐसा ही हुआ, जहां 85 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पाने वाला एक लिपिक मात्र 10 हजार रुपये की रिश्वत के लालच में सलाखों के पीछे पहुंच गया।

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औरंगाबाद समाचार: 85 हजार की सैलरी, फिर भी 10 हजार की रिश्वत? बाबू पहुंचा जेल, अंचल में हड़कंप

औरंगाबाद समाचार: कैसे बिछाया गया जाल और हुई गिरफ्तारी?

सोमवार को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की पटना से आई टीम ने हसपुरा अंचल के लिपिक श्लोक कुमार को उनके कार्यालय में ही रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। लिपिक 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़े गए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस गिरफ्तारी से जिले के सभी सरकारी कार्यालयों में हड़कंप मच गया। टीम उन्हें सीधे पटना ले गई, जहां मंगलवार को सभी न्यायिक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद उन्हें बेउर जेल भेज दिया गया।

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जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी लिपिक श्लोक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वहन भत्ता प्रदान किया जाएगा। प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, रिश्वत लेने की शिकायत को पहले सत्यापित किया गया, जिसके बाद निगरानी टीम ने एक जाल बिछाकर यह कार्रवाई की।

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उच्च वेतन के बावजूद भ्रष्टाचार का मकड़जाल

लिपिक श्लोक कुमार की गिरफ्तारी के बाद अंचल कार्यालय से लेकर समाहरणालय तक तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। बताया जा रहा है कि संबंधित लिपिक ने दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के काम के लिए अंचलाधिकारी (सीओ) के नाम पर रिश्वत की मांग की थी, हालांकि इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लोगों का कहना है कि हसपुरा अंचल ही नहीं, बल्कि किसी भी अंचल में बिना रिश्वत के दाखिल-खारिज का कार्य कराना लगभग असंभव है। इस तरह की शिकायतें रोजाना सामने आती हैं, लेकिन कार्रवाई के बावजूद यह भ्रष्टाचार पूरी तरह से थमने का नाम नहीं ले रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

गिरफ्तार लिपिक श्लोक कुमार की बहाली करीब सात वर्ष पूर्व अनुकंपा के आधार पर हुई थी। स्थापना शाखा के प्रभारी पदाधिकारी ने इस बात की पुष्टि की है। कम समय में ही एक अच्छी-खासी मासिक वेतन (लगभग 80 हजार रुपये) पाने के बावजूद रिश्वतखोरी में उनकी संलिप्तता ने पूरे विभाग की छवि को धूमिल किया है। विडंबना यह है कि हसपुरा अंचल लंबित मामलों के निष्पादन में राज्य स्तर पर पहला स्थान प्राप्त कर चुका है। राज्य में नंबर वन रैंक लाने वाला यह अंचल अब रिश्वतखोरी के मामले में सुर्खियों में आ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंकड़ों में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार की शिकायतें कम नहीं हुई हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/

निगरानी की लगातार कार्रवाई, फिर भी जारी रिश्वतखोरी

यह इस वर्ष निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की दूसरी बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 19 जनवरी को दाउदनगर अनुमंडलीय अस्पताल में भी एक लिपिक को गिरफ्तार किया गया था। उस लिपिक ने जीएनएम अर्चना कुमारी से छुट्टी की स्वीकृति के लिए दो हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी। उसे भी गिरफ्तार कर बेउर जेल भेजा गया था।

वर्ष 2025 में भी अंचलों से लेकर थाना स्तर तक कई बड़ी कार्रवाई की गई थी। 12 अगस्त 2025 को ओबरा अंचल के सोनहुली पंचायत के राजस्व कर्मचारी प्रमोद कुमार को 20 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। इसके ठीक 15 दिन बाद, नगर थाना गेट के पास एक दारोगा को अधिवक्ता से 20 हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार किया गया था। इसके अतिरिक्त, देव अंचल में भी रिश्वतखोरी के मामलों में राजस्व कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर तक पर प्राथमिकी दर्ज की जा चुकी है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

ये लगातार हो रही गिरफ्तारियां यह दर्शाती हैं कि भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन इसके बावजूद रिश्वतखोरी पर पूर्ण विराम नहीं लग पा रहा है। हर कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक सरकारी कार्यालयों में दहशत का माहौल जरूर बनता है, लेकिन समय बीतने के साथ ही हालात फिर से सामान्य हो जाते हैं और पुरानी प्रवृत्ति लौट आती है।

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