



Spice Farming in Bihar: जब खेतों की मिट्टी से अनाज की नहीं, बल्कि मसालों की सोंधी महक उठने लगे, तो समझिए कि फिजां बदल रही है और किसानों की तकदीर भी। बेगूसराय के किसानों ने पारंपरिक खेती के ढर्रे को छोड़कर कुछ ऐसा ही कमाल कर दिखाया है, जिससे उनकी मेहनत की कहानी अब पूरे राज्य के लिए एक मिसाल बन गई है।
Spice Farming in Bihar: कम लागत में मुनाफे का सौदा
पटना/बेगूसराय। बिहार के बेगूसराय जिले में बरौनी प्रखंड की केशावे पंचायत, इन दिनों खेती में एक नए अध्याय का गवाह बन रही है। यहां के प्रगतिशील किसान राज नारायण सिंह और मकरंद ने गेहूं-धान की पारंपरिक खेती से इतर मसालों की खेती का रास्ता चुना। आज उनकी यह पहल न केवल उनके खेतों को महका रही है, बल्कि उनकी आमदनी में भी जबरदस्त बढ़ोतरी कर रही है।
राज नारायण सिंह अपनी करीब एक एकड़ जमीन पर मेथी, अदरक, हल्दी, धनिया, मंगरेला और अजवाइन जैसी कई मसालों की मिश्रित खेती कर रहे हैं। उन्होंने पूसा स्थित डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय से मिली नई तकनीक, वैज्ञानिक मार्गदर्शन और उन्नत बीजों का सहारा लिया। उनका कहना है, “अगर किसान पूरी लगन और नई तकनीक के साथ काम करे, तो खेती अब घाटे का सौदा नहीं है।” वे बताते हैं कि मसालों की खेती में कुल उपज का महज 25 से 30 प्रतिशत ही लागत में खर्च होता है, जबकि मुनाफा कहीं ज्यादा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
नई तकनीक और मेहनत ने लिखी सफलता की कहानी
राज नारायण सिंह के अनुसार, मेथी की पैदावार प्रति एकड़ 8 से 10 क्विंटल तक हो जाती है, और अन्य मसाले भी बंपर उपज दे रहे हैं। वे फसल के साथ-साथ बीज उत्पादन का काम भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय हो रही है। उनकी इस सफलता ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत किया है, बल्कि गांव के छह अन्य लोगों को सालभर का रोजगार भी दिया है। जरूरत के अनुसार अतिरिक्त मजदूरों को भी काम मिलता है। उनकी सफलता देखकर जिले के दूसरे किसान भी प्रेरित हो रहे हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।उन्हीं की तरह, किसान मकरंद ने भी इस बदलाव को अपनाया है। उनका मानना है कि खेती को सिर्फ जीवनयापन का जरिया न समझकर एक सुनियोजित व्यवसाय की तरह करने से अच्छी आमदनी संभव है। मकरंद के मुताबिक, राज्य सरकार की योजनाएं छोटे और सीमांत किसानों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर आई हैं। यदि इन योजनाओं का लाभ सही तरीके से किसानों तक पहुंचे और वे नई तकनीकों को अपनाएं, तो मसालों जैसी नकदी फसलें किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल सकती हैं।
किसानों का सहारा बन रहीं सरकारी योजनाएं
जिला कृषि पदाधिकारी अभिषेक रंजन का कहना है कि राज नारायण सिंह और मकरंद जैसे किसान जिले में कृषि क्रांति की नई मिसाल हैं। उनकी सफलता साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, परिश्रम और आधुनिक तकनीक के संगम से खेती को एक लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।अभिषेक रंजन ने बताया कि राज्य सरकार ‘आत्मा’ (एग्रीकल्चरल टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी) योजना के तहत ऐसे प्रगतिशील किसानों को लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना के माध्यम से किसानों को न केवल जिले में, बल्कि दूसरे राज्यों में भी प्रशिक्षण और एक्सपोजर विजिट पर भेजा जाता है। इसका उद्देश्य उन्हें नई कृषि तकनीकों, उन्नत किस्मों और आधुनिक खेती के तरीकों से परिचित कराना है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा, बीज, उर्वरक, सिंचाई और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी किसानों का जोखिम कम करके उत्पादन बढ़ाने में सीधी मदद कर रही है।







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