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फ़रवरी, 10, 2026
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बेगूसराय में Child Marriage मुक्ति रथ को विधायक ने दिखाई हरी झंडी, जानिए इसके पीछे का मकसद

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बेगूसराय न्यूज़: Child Marriage: सदियों से समाज के आंगन में पसरी कुरीतियों की काली छाया को मिटाने के लिए अब एक नई किरण बेगूसराय की धरती पर पहुंची है। इस किरण का नाम है बाल विवाह मुक्ति रथ, जो जागरूकता की अलख जगाने निकला है।

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बेगूसराय में Child Marriage मुक्ति रथ को विधायक ने दिखाई हरी झंडी, जानिए इसके पीछे का मकसद

Child Marriage: क्या है बाल विवाह मुक्ति रथ का लक्ष्य?

जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रेन एलायेंस के सहयोगी संगठन वैशाली समाज कल्याण संस्थान एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकार के संयुक्त तत्वावधान में तैयार किया गया बाल विवाह मुक्ति रथ बेगूसराय पहुंच चुका है। इसका मुख्य उद्देश्य समाज में व्याप्त बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना और लोगों को इसके कानूनी एवं सामाजिक दुष्परिणामों के बारे में शिक्षित करना है। इस महत्वपूर्ण पहल को बेगूसराय के स्थानीय विधायक ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे इस जागरूकता अभियान को और गति मिली है। यह रथ जिले के विभिन्न ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जाकर लोगों को बाल विवाह के खिलाफ जागरूक करेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। यह रथ केवल एक वाहन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का प्रतीक है, जो हर दरवाजे तक शिक्षा और कानून का संदेश ले जाएगा।

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इस जागरूकता अभियान के तहत, रथ के माध्यम से नुक्कड़ नाटक, गीत और लघु फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा, ताकि लोग आसानी से इस गंभीर मुद्दे की संवेदनशीलता को समझ सकें। जिला विधिक सेवा प्राधिकार की टीम भी रथ के साथ यात्रा करेगी, जो लोगों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी सलाह और सहायता प्रदान करेगी। यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्ची कम उम्र में विवाह के बंधन में न बंधे, और हर बच्चे को शिक्षा तथा सुरक्षित बचपन का अधिकार मिले। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। यह एक व्यापक प्रयास है जिसका लक्ष्य समाज में गहरी जड़ें जमा चुकी इस बुराई को खत्म करना है।

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समाज में बदलाव की उम्मीद और सहभागिता

इस अभियान से आशा है कि बेगूसराय जिले में बाल विवाह की घटनाओं में कमी आएगी और लड़कियों को बेहतर भविष्य मिलेगा। इस पहल की सफलता के लिए सामुदायिक सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों, पंचायती राज संस्थाओं, शिक्षकों और अभिभावकों को इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। तभी जाकर हम एक ऐसे समाज का निर्माण कर पाएंगे, जहां हर बच्चा अपनी पूरी क्षमता को प्राप्त कर सके। यह सिर्फ सरकारी या गैर-सरकारी संगठनों का ही काम नहीं, बल्कि हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है कि अपने आसपास बाल विवाह जैसी कुप्रथा को पनपने न दें। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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