पटना न्यूज़: राजधानी पटना की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली बेऊर केंद्रीय जेल में मंगलवार की सुबह अचानक हड़कंप मच गया। अभी सूरज की किरणें ठीक से फैली भी नहीं थीं कि प्रशासन की एक बड़ी टीम ने जेल पर धावा बोल दिया, जिसने एक-एक कर कई वार्डों को खंगाल डाला। इस अचानक हुई कार्रवाई ने जेल के गलियारों में सन्नाटा तोड़ दिया और कैदियों के साथ-साथ स्टाफ में भी हलचल मचा दी। आखिर क्या था इस ‘सीक्रेट मिशन’ का असली मकसद, जिसने सुबह-सुबह पूरे जेल महकमे को जगा दिया?
मिली जानकारी के अनुसार, यह कार्रवाई सुबह-सुबह लगभग 5 बजे शुरू हुई, जब पटना जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व में एक दल बेऊर जेल पहुंचा। टीम में मजिस्ट्रेट, पुलिस उपाधीक्षक और भारी संख्या में पुलिस बल शामिल था। सुरक्षा के मद्देनजर जेल के मुख्य द्वार से लेकर अंदर तक कड़ी निगरानी रखी गई ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके और छापेमारी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा सके।
वार्डों की सघन तलाशी
छापेमारी दल ने जेल के विभिन्न वार्डों में गहन तलाशी अभियान चलाया। कैदियों के बैरकों, शौचालयों, और अन्य सभी संभावित ठिकानों को बारीकी से चेक किया गया। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य जेल के अंदर से किसी भी तरह की आपत्तिजनक सामग्री, जैसे मोबाइल फोन, चार्जर, सिम कार्ड, धारदार हथियार, मादक पदार्थ या अन्य गैरकानूनी वस्तुओं की बरामदगी करना था। यह कार्रवाई जेल मैनुअल के उल्लंघन को रोकने और कैदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी।
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बताया जा रहा है कि यह छापेमारी जेल सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने और कैदियों द्वारा जेल के अंदर से किसी भी आपराधिक गतिविधि को अंजाम देने से रोकने के लिए की गई थी। अक्सर ऐसी खबरें आती रही हैं कि जेलों से अपराधी अपने नेटवर्क को संचालित करते हैं, जिसे तोड़ने के लिए नियमित अंतराल पर ऐसी कार्रवाईयां जरूरी मानी जाती हैं ताकि जेलों को अपराध का केंद्र बनने से रोका जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था पर जोर
हालांकि, आधिकारिक तौर पर यह जानकारी नहीं दी गई है कि छापेमारी के दौरान कोई विशेष आपत्तिजनक वस्तु बरामद हुई है या नहीं। अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई के दौरान गोपनीयता बनाए रखी और मीडिया से किसी भी तरह की जानकारी साझा करने से परहेज किया। इस तरह की छापेमारी राज्य की जेलों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और जेल मैनुअल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जाती है। प्रशासन का मानना है कि ऐसी औचक कार्रवाईयों से कैदियों में भय बना रहता है और वे जेल नियमों का उल्लंघन करने से बचते हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी कार्रवाईयां
गौरतलब है कि बिहार की जेलों में, खासकर बेऊर जैसी केंद्रीय जेलों में, समय-समय पर ऐसी छापेमारी की जाती रही हैं ताकि जेल के अंदर से होने वाले आपराधिक गतिविधियों पर लगाम लगाई जा सके और जेलों को पूरी तरह से सुरक्षित बनाया जा सके। बेऊर जेल, राज्य की सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण जेलों में से एक है, जहां कई कुख्यात अपराधी और विचाराधीन कैदी बंद हैं। इसलिए इसकी सुरक्षा हमेशा प्रशासन की प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रहती है। इससे पहले भी बेऊर जेल में कई बार औचक छापेमारी की जा चुकी हैं, जिनमें कई बार मोबाइल फोन और अन्य प्रतिबंधित वस्तुएं बरामद हुई हैं। ये कार्रवाईयां इस बात को सुनिश्चित करती हैं कि जेल प्रशासन अपनी ड्यूटी के प्रति सतर्क है और किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं छोड़ना चाहता, ताकि जेल परिसर के भीतर किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधियों को पनपने का मौका न मिल सके।



