
अंडरग्राउंड बिजली के तार: भागलपुर जिले में सड़कों से बिजली के पोल हटाने और यातायात को सुगम बनाने की एक बड़ी योजना अधर में लटक गई है। 301.58 करोड़ रुपये की यह परियोजना, जिसके तहत 355 किलोमीटर तारों को भूमिगत किया जाना था, अब वित्तीय वर्ष के अंत तक भी मंजूरी की बाट जोह रही है।
भागलपुर जिले में 355 किलोमीटर बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने के लिए 301.58 करोड़ रुपये का एक विस्तृत प्राक्कलन (estimate) मुख्यालय भेजा गया था। विधानसभा चुनाव के ठीक बाद राजधानी पटना के लिए तो ऐसी ही योजना को मंजूरी मिल गई, लेकिन भागलपुर की झोली अब तक खाली है। इस वित्तीय वर्ष में इस महत्वपूर्ण परियोजना को हरी झंडी मिलने की उम्मीद थी, पर अब इसमें और देरी होती दिख रही है।
बिजली विभाग ने इस परियोजना को साल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह समय सीमा अब पूरी होती नहीं दिख रही। इस ‘भागलपुर बिजली परियोजना’ में देरी का सीधा असर शहर के विकास पर पड़ेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1।
करोड़ों की योजना, अधूरी आस
इस महत्त्वाकांक्षी योजना के तहत 178 किलोमीटर के 33 हजार वोल्ट और 177 किलोमीटर के 11 हजार वोल्ट के तारों को भूमिगत किया जाना है। इसके साथ ही, रेलवे क्रॉसिंग और राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी बिजली के तारों को जमीन के भीतर बिछाने का प्रावधान है। विद्युत विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इससे संबंधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पहले ही मुख्यालय भेजी जा चुकी है।
कब बिछेंगे अंडरग्राउंड बिजली के तार?
साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के अधीक्षण अभियंता संजय कुमार बोरिया ने इस संबंध में जानकारी दी है। उनके मुताबिक, भागलपुर में ‘अंडरग्राउंड बिजली के तार’ बिछाने की इस योजना को दूसरे चरण में मंजूरी मिलने की प्रबल संभावना है। डीपीआर की मंजूरी मिलते ही इस पर काम शुरू कर दिया जाएगा।
क्या मिलेंगे ये फायदे?
जब यह ‘भागलपुर बिजली परियोजना’ धरातल पर उतरेगी, तो इसका सबसे बड़ा लाभ सड़कों से बिजली के पोल हटने के रूप में मिलेगा। इससे सड़कों की चौड़ाई बढ़ेगी और यातायात व्यवस्था काफी सुगम हो जाएगी। इसके अलावा, बिजली चोरी और दुर्घटनाओं में भी कमी आएगी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का No.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें







