Child distributes blankets: कड़ाके की ठंड में जब बड़े-बड़े लोग अपने घरों में दुबके रहते हैं, तब एक नन्हे से दिल ने गर्मी का पैगाम पहुंचाया। भागलपुर के मोदीनगर मोहल्ले के एक चार वर्षीय मासूम बच्चे ने अपनी गुल्लक तोड़कर बेघर और जरूरतमंदों को कंबल बांटे, जिसने समाज में एक नई मिसाल पेश की है।
Child distributes blankets: 4 साल के रियांश ने गुल्लक तोड़कर बांटे कंबल, पेश की इंसानियत की मिसाल
Child distributes blankets: नन्हे हाथों से बंटा प्यार और इंसानियत का संदेश
भागलपुर के मोदीनगर मोहल्ले के निवासी रियांश कुमार, जो माउंट एसएससी स्कूल में केजी कक्षा के छात्र हैं, ने हाल ही में एक ऐसा सराहनीय कार्य किया है, जिसने सभी को प्रेरणा दी है। मकर संक्रांति के पावन अवसर पर जहां कई जगहों पर कंबल वितरण और दरिद्रनारायण भोज का आयोजन किया जा रहा था, वहीं इस छोटे से बालक ने कुछ अलग करने की ठानी।
रियांश ने अपनी गुल्लक तोड़ी और उसमें जमा किए गए सारे पैसे निकाल लिए। इसके बाद, उसने अपने पिता से कंबल खरीदने की जिद पकड़ ली। अपने बच्चे की नेक जिद को देखकर उनके पिता ने तुरंत कंबल लाकर दिए। रियांश ने फिर उन कंबलों में से एक जरूरतमंद महिला को वितरित कर दिया, जिसकी शीतलहर से ठिठुरन कम हो सकी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
इस चार वर्षीय बच्चे की उम्र भले ही कम है, लेकिन उसका हृदय किसी समंदर से कम नहीं। यह एक ऐसा कार्य है जिसकी कल्पना बड़े-बड़े लोग भी नहीं कर पाते या सोच नहीं सकते, लेकिन एक मासूम ने उसे हकीकत में बदल दिया। रियांश की इस पहल ने समाज को मानवता का संदेश दिया है और यह साबित किया है कि निस्वार्थ सेवा की कोई उम्र नहीं होती।
एक मासूम की नेक पहल, समाज के लिए प्रेरणा
यह उल्लेखनीय है कि रियांश भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार लाल के भतीजे हैं। रियांश का यह कदम केवल कंबल वितरण तक सीमित नहीं था, बल्कि यह समाज में दूसरों के प्रति संवेदनशीलता और परोपकार की भावना जगाने वाला एक सशक्त मानवता का संदेश है। उनकी यह छोटी सी कोशिश बताती है कि हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी छोटा क्यों न हो, समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता रखता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
यह घटना साबित करती है कि छोटी उम्र और बड़े दिल का संगम क्या कुछ नहीं कर सकता, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस उम्र में जहां बच्चे खिलौनों के सपने देखते हैं, वहीं रियांश ने दरिद्रनारायण की सेवा का संकल्प लिया, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उम्मीद है कि रियांश की यह कहानी और भी कई बच्चों और बड़ों को ऐसे नेक कार्यों के लिए प्रेरित करेगी।

