
भागलपुर समाचार: शहर के बीचों-बीच एक पुल, जिसके नीचे सदियों से एक ऐसी मजार है जहां हर साल आस्था का समंदर उमड़ता है. इस बार भी वही हुआ, जब 425 साल पुरानी परंपरा को निभाने के लिए हजारों हाथ दुआ में उठे. आखिर कौन हैं ये पीर और क्यों है इनकी इतनी मान्यता?
भागलपुर के ऐतिहासिक लोहिया पुल के नीचे स्थित हजरत पीर दमड़िया शाह रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह पर मंगलवार को 425वां उर्स-ए-पाक पूरी श्रद्धा और धूमधाम के साथ मनाया गया. इस खास मौके पर दरगाह को फूलों और रंगीन रोशनियों से खूबसूरती से सजाया गया था. सुबह से ही यहां अकीदतमंदों (श्रद्धालुओं) का तांता लगना शुरू हो गया था, जो देर शाम तक जारी रहा.
चादरपोशी कर मांगी अमन-चैन की दुआ
उर्स के इस मुबारक मौके पर सबसे महत्वपूर्ण रस्म चादरपोशी की अदा की गई. शहर और आसपास के इलाकों से आए हजारों जायरीनों ने मजार पर मखमली चादरें और फूल पेश किए. लोगों ने मुल्क में अमन, शांति और भाईचारे की दुआ की. इसके साथ ही अपने परिवार की खुशहाली, कारोबार में तरक्की और बेहतर स्वास्थ्य के लिए भी मन्नतें मांगीं. इस दौरान पूरा माहौल रूहानी और भक्तिमय हो गया.
425 वर्षों से जारी है परंपरा
हजरत पीर दमड़िया शाह की यह दरगाह सैकड़ों वर्षों से सभी धर्मों के लोगों के लिए आस्था का एक बड़ा केंद्र रही है. 425 वर्षों से यहां हर साल उर्स का आयोजन होता आ रहा है, जो शहर की गंगा-जमुनी तहजीब की एक मिसाल है. यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है और लोग पूरी अकीदत के साथ इसे निभाते हैं.
इस आयोजन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. दरगाह के आसपास का इलाका जायरीनों की भीड़ से गुलजार रहा. दूर-दराज से आए लोगों ने यहां दुआएं मांगीं और इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने.




