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मार्च, 11, 2026
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Agri Startups: ‘भारती’ योजना से बदलेगी देश के कृषि सेक्टर की तस्वीर, स्टार्टअप्स को मिलेगी अंतरराष्ट्रीय उड़ान

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Agri Startups: जैसे एक छोटा बीज विशाल वृक्ष का रूप लेता है, वैसे ही देश के कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप्स की नई पौध लहलहाने को तैयार है। केंद्र सरकार की एक पहल अब इन नन्हें पौधों को खाद-पानी देकर इन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार के वटवृक्ष में बदलने जा रही है। भारत सरकार के वाणिज्य मंत्रालय की इकाई एपीडा (APEDA) ने ‘भारती’ नामक एक महत्वाकांक्षी पहल का शंखनाद किया है, जिसका लक्ष्य कृषि आधारित स्टार्टअप्स को पंख देना और भारतीय कृषि उत्पादों को वैश्विक मंच पर स्थापित करना है। इस योजना से देश में न केवल स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूती मिलेगी, बल्कि कृषि निर्यात में भी बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

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‘भारती’ पहल से Agri Startups को मिलेगी नई दिशा

एपीडा की इस ‘भारती’ पहल के तहत भविष्य में देश के शीर्ष 10 कृषि स्टार्टअप्स को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने नवाचारों और उत्पादों को प्रदर्शित करने का सुनहरा अवसर प्रदान किया जाएगा। यह कदम न केवल इन उभरते उद्यमियों को वैश्विक पहचान दिलाएगा, बल्कि दुनिया के सामने भारत की कृषि क्षमता का भी प्रदर्शन करेगा। एपीडा का मानना है कि यह पहल देश में Agri Startups के लिए एक वरदान साबित होगी और इससे किसानों, उद्यमियों और निर्यातकों के बीच एक मजबूत और प्रभावी समन्वय स्थापित हो सकेगा।

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इसी दिशा में बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डी. आर. सिंह ने बताया कि उनके संस्थान में वर्तमान में 77 एग्री स्टार्टअप्स सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। ये स्टार्टअप्स कृषि उत्पादन, फूड प्रोसेसिंग, और एग्री-इनोवेशन जैसे क्षेत्रों में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहे हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। विश्वविद्यालय नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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भविष्य की खाद्य चुनौतियों पर होगा अंतरराष्ट्रीय मंथन

डॉ. सिंह ने यह भी जानकारी दी कि आगामी फरवरी महीने में विश्वविद्यालय “फूड सिस्टम्स इन ट्रांजिशन” विषय पर एक अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन करने जा रहा है। इस संगोष्ठी में भविष्य में भोजन की बदलती प्रकृति, पोषण सुरक्षा, टिकाऊ कृषि और खाद्य प्रणालियों के रूपांतरण जैसे गंभीर विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। इस कार्यक्रम में मेक्सिको, थाईलैंड, ट्यूनीशिया, रूस, मलेशिया, घाना और ढाका समेत कई देशों के जाने-माने कृषि वैज्ञानिक और विशेषज्ञ शामिल होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज के समय में फूड सेफ्टी और क्वालिटी पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी प्राथमिकता बन चुकी है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

जीआई टैग और स्टार्टअप्स से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को साकार करते हुए देश के हर राज्य की विशिष्ट कृषि पहचान को वैश्विक पटल पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग को लेकर भी ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। डॉ. सिंह के अनुसार, अब तक 32 कृषि उत्पादों की जीआई मान्यता के लिए आवेदन दाखिल किए जा चुके हैं। यह प्रयास स्थानीय उत्पादों को एक ब्रांड के रूप में स्थापित करेगा, जिससे कृषि निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ये जीआई टैग वाले उत्पाद बड़े स्टार्टअप्स का रूप ले सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अनगिनत नए अवसर पैदा होंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कृषि प्रधान देश भारत में यह पहल निश्चित रूप से जीडीपी ग्रोथ को मजबूत करने और आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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