

Banka Murder Case: कानून के हाथ लंबे होते हैं, ये कहावत तो सुनी होगी, लेकिन जब 16 साल बाद इंसाफ का हथौड़ा चलता है, तो इसकी गूंज दूर तक सुनाई देती है। बिहार के बांका में एक ऐसे ही मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है, जहां एक पिता को अपने बेटे के लिए न्याय का लंबा इंतजार करना पड़ा।
Banka Murder Case: 16 साल पुराने हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा, संतोष राय के कातिल को मिली उम्रकैद की सजा
Banka Murder Case: बांका में हत्या के एक 16 साल पुराने मामले में शनिवार को अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। एडीजे-तृतीय अतुल वीर सिंह की अदालत ने मामले में एकमात्र अभियुक्त प्रकाश यादव को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोषी पर डेढ़ लाख रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया है। यह फैसला उस पिता के लिए एक बड़ी राहत है जिसने अपने बेटे को खोने के बाद न्याय के लिए एक लंबी और कठिन लड़ाई लड़ी।
मामले की जानकारी देते हुए अभियोजन पक्ष ने बताया कि यह घटना 2010 की है। टाउन थाना क्षेत्र के लक्ष्मीपुर गांव के रहने वाले संतोष कुमार राय की नृशंस हत्या कर दी गई थी। इस संबंध में मृतक के पिता आनंदी राय ने 8 जुलाई 2010 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने अपनी शिकायत में गांव के ही प्रकाश यादव पर अपने बेटे को घर से बुलाकर ले जाने और फिर उसकी हत्या कर देने का आरोप लगाया था।
क्या था पूरा Banka Murder Case?
दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, प्रकाश यादव मृतक संतोष कुमार राय को पेंटिंग के काम का बहाना देकर बांका शहर ले गया था। जब देर रात तक संतोष घर नहीं लौटा तो परिवार वालों को चिंता हुई। पिता आनंदी राय ने जब प्रकाश यादव से अपने बेटे के बारे में पूछा तो वह गोलमोल जवाब देने लगा और किसी भी तरह की जानकारी होने से इनकार करता रहा। इसी बीच, दो-तीन दिन बाद पुलिस को एक सिर कटी लाश मिलने की सूचना मिली, जिसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल लाया गया था।
खबर मिलते ही आनंदी राय तुरंत सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने शव की शिनाख्त अपने बेटे संतोष कुमार राय के रूप में की। यह उनके लिए किसी पहाड़ टूटने जैसा था। पुलिस ने जांच के दौरान चांदन नदी से शव बरामद किया था और घटनास्थल से करीब सौ मीटर की दूरी पर मृतक का सिर भी बरामद हुआ था। इस जघन्य अपराध ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
गवाहों के बयान और पुलिस की जांच ने दिलाई सजा
पुलिस अनुसंधान में यह बात सामने आई कि हत्या वाले दिन अभियुक्त प्रकाश यादव ने पहले संतोष को खाना खिलाया और फिर उसे अमरपुर में सर्कस देखने चलने के लिए कहा। लेकिन ऑटो पर बैठने के बाद उसने अचानक प्रोग्राम बदल दिया और सिनेमा देखने की बात करने लगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। जांच में पता चला कि इस हत्या के पीछे पुरानी दुश्मनी मुख्य कारण थी।
न्यायालय में इस मामले पर लंबी सुनवाई चली, जिसके दौरान कुल 16 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। सभी गवाहों के बयान और पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर अदालत ने प्रकाश यादव को हत्या का दोषी पाया। आखिरकार, 16 साल के लंबे इंतजार के बाद, अदालत ने दोषी को उसके किए की सजा सुनाते हुए आजीवन कारावास का दंड दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। इस फैसले के बाद मृतक के पिता ने न्यायपालिका पर अपना विश्वास जताया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





