
High Court Bench: न्याय का तराजू भारी तो होता ही है, लेकिन पूर्वी बिहार के लोगों के लिए यह बहुत दूर भी है। दशकों पुरानी एक मांग अब आंदोलन का रूप ले चुकी है और इंसाफ की इस लड़ाई में वकीलों के धरने के 100 दिन पूरे हो गए हैं। भागलपुर में पटना उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ की स्थापना की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का संघर्ष लगातार तेज होता जा रहा है। बुधवार को कलेक्ट्रेट कार्यालय के ठीक पीछे चल रहे इस धरने ने 100 दिन का आंकड़ा पार कर लिया, जो इस आंदोलन की गंभीरता को दर्शाता है।
क्यों जरूरी है भागलपुर में High Court Bench?
पूर्वी बिहार के ऐतिहासिक और व्यावसायिक केंद्र भागलपुर में उच्च न्यायालय की बेंच की मांग कोई नई नहीं है। यह लड़ाई साल 1967 से ही विभिन्न सामाजिक संगठनों और अधिवक्ताओं द्वारा लड़ी जा रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता ओमप्रकाश तिवारी ने इस मुद्दे पर जोर देते हुए कहा कि भागलपुर में बेंच की स्थापना से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आएगी और आसपास के लगभग 15 जिलों की जनता को सीधा फायदा मिलेगा। उन्होंने बताया, “अभी इन जिलों के लोगों को न्याय के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर पटना उच्च न्यायालय जाना पड़ता है, जिसमें न केवल समय बर्बाद होता है, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता है।” इस आंदोलन को अब और व्यापक बनाने की तैयारी चल रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। रणनीति के तहत भागलपुर के अलावा आसपास के जिलों के सामाजिक संगठनों को भी इस मुहिम से जोड़ा जा रहा है ताकि सरकार पर दबाव बनाया जा सके।
सड़क पर उतरने की चेतावनी
धरने पर बैठे अधिवक्ताओं ने साफ कर दिया है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर जल्द कोई सकारात्मक फैसला नहीं लेती है, तो यह आंदोलन और भी तेज होगा। ओमप्रकाश तिवारी ने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर वे सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे इस जनहित के मुद्दे को विधानसभा में पूरी मजबूती से उठाएं। यह जानना महत्वपूर्ण है कि यह मामला पहले भी संसद में उठाया जा चुका है, लेकिन तब इसे यह कहकर टाल दिया गया था कि बिहार सरकार की ओर से इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं भेजा गया है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। अब सारी निगाहें राज्य सरकार के पाले में हैं कि वह इस पर कब पहल करती है। पूर्वी बिहार की जनता को उम्मीद है कि इस बार उनकी दशकों पुरानी मांग पर सरकार गंभीरता से विचार करेगी और उन्हें सस्ता और सुलभ न्याय मिल सकेगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

