
Bhagalpur News: आस्था का समंदर तो उमड़ा, पर प्रशासन की अनदेखी ने उम्मीदों के किनारे पर बसे मेले को उजाड़ दिया। शहर के मानस कामना नाथ मंदिर में चैती दुर्गा पूजा तो धूमधाम से संपन्न हुई, लेकिन दिलों में एक कसक रह गई। वर्षों से चली आ रही मेले की परंपरा इस साल भी प्रशासन की अनुमति के इंतजार में अधूरी रह गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।
Bhagalpur News: मेले की अनुमति न मिलने से गहराया विवाद
भागलपुर के प्रसिद्ध मानस कामना नाथ मंदिर परिसर में इस वर्ष भी चैती दुर्गा पूजा का आयोजन पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुआ। पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि सभी अनुष्ठान विधि-विधान से किए गए, जिससे पूरा क्षेत्र भक्ति के माहौल में सराबोर रहा। लेकिन इस धार्मिक उत्सव की खुशी पर प्रशासनिक उदासीनता का ग्रहण लग गया।
स्थानीय निवासियों और आयोजकों ने आरोप लगाया है कि जिला प्रशासन ने इस साल भी परंपरागत मेले के आयोजन के लिए अनुमति नहीं दी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। लोगों का कहना है कि यह केवल एक मेला नहीं, बल्कि उनकी सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, जिसे प्रशासन लगातार नजरअंदाज कर रहा है।स्थानीय लोगों के अनुसार, वर्षों से पूजा के साथ-साथ यहां भव्य मेला लगता आया है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए आकर्षण का केंद्र रहता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रशासन खेल के मैदान या अन्य उपयुक्त स्थान पर मेला लगाने की अनुमति देने में आनाकानी कर रहा है। इस बार भी जब आयोजकों ने अनुमति के लिए संपर्क किया, तो उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली, जिससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
प्रशासन पर दोहरे मापदंड का आरोप
मेला न लगने से नाराज लोगों ने जिला प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी गंभीर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि शहर में अन्य आयोजनों को आसानी से अनुमति मिल जाती है, लेकिन जब बात पारंपरिक चैती दुर्गा पूजा मेले की आती है, तो प्रशासन उदासीन रवैया अपना लेता है। इस भेदभावपूर्ण रवैये ने लोगों के मन में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। मेला न लगने का सीधा असर उन छोटे दुकानदारों और स्थानीय व्यवसायियों पर पड़ा है, जो इस आयोजन से अपनी रोजी-रोटी कमाते थे।लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस परंपरा को जीवित रखने के लिए आगे आएं और अगले वर्ष से मेले के भव्य आयोजन के लिए अनुमति सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि यह न केवल धार्मिक आस्था का विषय है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार से भी जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण पहलू है। प्रशासन की इस चुप्पी से आसपास के क्षेत्रों में भी नाराजगी का माहौल बना हुआ है।



