Bhagalpur News: भागलपुर की राजनीति का एक मज़बूत स्तंभ ढह गया, जिसने अपनी पूरी ज़िंदगी मज़दूरों और शोषितों के हक़ की लड़ाई में लगा दी। वयोवृद्ध कम्युनिस्ट नेता कॉमरेड नागेन्द्र झा ने शनिवार, 3 जनवरी को 93 वर्ष की आयु में इशाकचक स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। वे भागलपुर नगर निगम के एक सेवानिवृत्त कर्मी थे और अपने पीछे एक लंबी संघर्ष की विरासत छोड़ गए हैं।
कॉमरेड झा 1950 के दशक में ही कम्युनिस्ट आंदोलन की मुख्यधारा से जुड़ गए थे। उन्होंने हमेशा मेहनतकशों और मजदूरों की लड़ाई को अपनी लड़ाई समझा। बाद में जब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) का गठन हुआ, तो वे इसके एक समर्पित सदस्य बन गए और मुख्य रूप से मजदूर अधिकारों के संघर्ष में अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने मजदूर एकता मंच के सचिव के तौर पर मजदूरों को संगठित करने का महत्वपूर्ण कार्य किया।
Bhagalpur News: रिक्शा चालकों से लेकर निगम कर्मियों तक के लिए लड़ी लड़ाई
कॉमरेड नागेंद्र झा की पहचान एक ऐसे जुझारू नेता की थी जो ज़मीनी मुद्दों को लेकर हमेशा संघर्षरत रहते थे। उन्होंने शहर के रिक्शा चालकों पर होने वाले जुल्म और शोषण के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अलावा, नगर निगम में सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए पेंशन की सुविधा शुरू करवाने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। उन्होंने इसके लिए एक लंबी लड़ाई लड़ी और विडंबना यह है कि वे नगर निगम कार्यालय से पेंशन पाने वाले पहले सेवानिवृत्त कर्मी भी बने।
उनके निधन की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र की वामपंथी कतारों में शोक की लहर दौड़ गई। ऐक्टू के राज्य सचिव व भाकपा (माले) के जिला कमेटी सदस्य मुकेश मुक्त एवं भाकपा (माले) के नगर सचिव विष्णु कुमार मंडल ने स्थानीय बरारी घाट पहुंचकर उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उनके पुत्र महाकांत झा एवं पूर्व आइसा नेता ललन झा से मिलकर पार्टी की ओर से गहरी संवेदना व्यक्त की। इससे पहले, बिहार राज्य स्थानीय निकाय कर्मचारी महासंघ (ऐक्टू) के पूर्व राज्य सचिव मनोज कृष्ण सहाय भी उनके आवास पर पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी।
वामपंथी कतारों में शोक की लहर, बरारी घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
भाकपा (माले) के राज्य कमेटी सदस्य एवं ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसके शर्मा ने उनके निधन पर गहरा शोक जताते हुए कहा, “कॉमरेड नागेंद्र झा एक जुझारू और संवेदनशील व्यक्ति थे। वे एक सच्चे कम्युनिस्ट नेता थे जो सेवानिवृत्ति के बाद भी मजदूरों और कर्मचारियों के अधिकारों के लिए संघर्ष करते रहे। उनका जाना वाम आंदोलन, विशेषकर मजदूरों के आन्दोलन के लिए एक अपूरणीय क्षति है।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
उनका अंतिम संस्कार स्थानीय बरारी घाट पर संपन्न हुआ, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। इस अवसर पर पूर्व प्रोफेसर अर्जुन प्रसाद यादव, मुकेश मुक्त, विष्णु कुमार मंडल, उनके दोनों पुत्र महाकांत झा और ललन झा समेत कई रिश्तेदार और पड़ोसी उपस्थित थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके अतिरिक्त, भाकपा-माले के कई अन्य नेताओं, जिनमें एसके शर्मा, सुरेश प्रसाद साह, बिंदेश्वरी मंडल, महेश प्रसाद यादव और सुभाष कुमार शामिल हैं, ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके जाने से आंदोलन में एक खालीपन आ गया है, जिसे भरना मुश्किल होगा।





