

Farmer Registry: किसानों की पहचान का डिजिटल बही-खाता अब तैयार हो रहा है, जिसमें हर दाने का हिसाब और हर किसान का नाम दर्ज होगा। भागलपुर में इस महाअभियान को लेकर प्रशासन ने कमर कस ली है और जिलाधिकारी ने इसे लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं।
Farmer Registry: भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित एक उन्मुखीकरण कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने स्पष्ट कर दिया है कि जिले के हर किसान का निबंधन होना अनिवार्य है। उन्होंने इस अभियान में लगे अधिकारियों और कर्मियों को धन्यवाद देते हुए कहा कि संख्या के मामले में भागलपुर पूरे बिहार में तीसरे स्थान पर है, जो एक बड़ी उपलब्धि है। वहीं, प्रधानमंत्री सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों के फार्मर रजिस्ट्री के मामले में जिला चौथे पायदान पर है।
जिलाधिकारी ने कहा, “हमसे आगे शिवहर, कटिहार और पूर्णिया हैं। हमारा लक्ष्य है कि पीएम किसान निधि के हर लाभार्थी को ढूंढ-ढूंढ कर उनका फार्मर रजिस्ट्री किया जाए।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर किसान की एक विशिष्ट पहचान होनी चाहिए, जो उसका किसान नंबर या किसान आईडी होगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सरकार उन्हीं को किसान मानती है जिनके नाम पर अपनी जमीन है और उनका निबंधन होना ही फार्मर रजिस्ट्रेशन है।
क्या है Farmer Registry और क्यों है यह अनिवार्य?
जिलाधिकारी डॉ. चौधरी ने सरल शब्दों में समझाते हुए कहा कि चाहे कोई व्यक्ति नौकरीपेशा हो या व्यवसायी, अगर उसके नाम पर खेती की जमीन है तो उसका किसान के तौर पर निबंधन होना आवश्यक है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा, “भविष्य में खाद और बीज जैसी जरूरी चीजें सिर्फ उन्हीं किसानों को मिलेंगी जिनके पास फार्मर आईडी होगी।” इतना ही नहीं, पैक्स में फसल बेचने के लिए भी यह आईडी अनिवार्य होगी।
उन्होंने बताया कि भागलपुर की लगभग 80 से 85 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए जिनके भी नाम से जमीन है, उन सभी का ई-केवाईसी और किसान रजिस्ट्रेशन करवाना अनिवार्य है। जिलाधिकारी ने सभी मुखिया, प्रखंड विकास पदाधिकारियों, अंचलाधिकारियों और कृषि पदाधिकारियों को टीम भावना के साथ आपसी समन्वय स्थापित कर बचे हुए किसानों का पंजीकरण पूरा करने का निर्देश दिया। इस कार्य को अभियान मोड में 2 मार्च तक पूरा करने के लिए एक अग्रिम रणनीति बनाने को भी कहा गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अधिकारियों ने साझा किए अपने अनुभव
कार्यक्रम के दौरान उप विकास आयुक्त प्रदीप कुमार सिंह ने PM Kisan Samman Nidhi के अंशदान को 40-50% तक पहुंचाने के लिए सभी प्रखंडों से दृढ़ संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कार्य के दौरान पूर्ण अनुशासन बनाए रखने का भी निर्देश दिया। वहीं, अपर समाहर्ता (राजस्व) दिनेश राम ने कहा कि बचे हुए लक्ष्य को हासिल करने के लिए उपलब्ध डेटा के आधार पर वार्ड-वार दैनिक योजना बनाकर काम किया जाना चाहिए।
इस अवसर पर कहलगांव, नारायणपुर, जगदीशपुर, सन्हौला और सबौर के प्रखंड विकास पदाधिकारियों के साथ-साथ सबौर के प्रखंड कृषि पदाधिकारी और बहादुरपुर खीरी बांध के मुखिया ने भी इस अभियान से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। सभी ने मिलकर इस अभियान को समय पर सफल बनाने का संकल्प लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


