
Ganga Water Lift Project: विकास की गंगा और विस्थापन का दर्द, जब एक ही सिक्के के दो पहलू बन जाएं तो टकराव होना लाज़मी है। कुछ ऐसा ही नज़ारा भागलपुर में देखने को मिल रहा है, जहां मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
नीतीश के ड्रीम प्रोजेक्ट पर लगा ग्रहण? भागलपुर में किसानों ने रोका Ganga Water Lift Project का काम, मुआवजे पर मचा घमासान
भागलपुर जिले के सुल्तानगंज प्रखंड स्थित कमरगंज पंचायत में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी Ganga Water Lift Project योजना पर किसानों के विरोध के कारण ग्रहण लगता दिख रहा है। मंगलवार को जब निर्माण कंपनी जीवीपीआर के प्रतिनिधि राजेश कुमार सिंह ने कार्य स्थल पर मिट्टी गिराने का काम शुरू किया, तो जमीन मालिक किसानों ने इसे तुरंत रोक दिया। किसानों का आरोप है कि कंपनी जबरन उनकी पैतृक जमीन पर कब्ज़ा करने की कोशिश कर रही है।
आखिर क्यों रुका Ganga Water Lift Project का काम?
पीड़ित किसान अशोक कुमार यादव ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा, “हमारी पैतृक जमीन का एक बड़ा हिस्सा पहले ही हवाई अड्डे के रनवे के लिए चला गया है। अब जो बची हुई जमीन है, वह भी इस परियोजना में जा रही है। अगर यह जमीन भी चली गई तो हमारा परिवार कहाँ रहेगा और क्या खाएगा?” किसानों का यह डर पूरी तरह से जायज़ है, क्योंकि उनकी आजीविका और भविष्य इसी जमीन से जुड़ा है। इस जटिल जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया के कारण ही फिलहाल काम रुका हुआ है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। किसानों का कहना है कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना या सहमति के उनकी जमीन पर काम शुरू कर दिया गया, जो पूरी तरह से गलत है।वहीं, कंपनी के प्रतिनिधि राजेश कुमार सिंह ने बताया कि यह मुख्यमंत्री की एक ड्रीम प्रोजेक्ट योजना है, जिसके तहत गंगा का पानी लिफ्ट कर हनुमान डैम और खड़गपुर झील तक पहुंचाया जाना है। उन्होंने कहा, “इस योजना से आसपास के हज़ारों किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और क्षेत्र का विकास होगा।” लेकिन जब मंगलवार को काम शुरू किया गया तो जमीन मालिकों ने इसे रोक दिया। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
“पहले मुआवजा, फिर काम”: किसानों की स्पष्ट मांग
किसानों का विरोध केवल जमीन जाने को लेकर नहीं है, बल्कि मुआवजे की अनिश्चितता को लेकर भी है। कई किसानों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक उन्हें मुआवजा राशि का आधिकारिक नोटिस नहीं मिल जाता, तब तक वे अपनी जमीन पर एक इंच भी काम नहीं होने देंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। हालांकि, कंपनी प्रतिनिधि के अनुसार, विभाग द्वारा मुआवजे की प्रक्रिया जारी है, लेकिन किसान लिखित आश्वासन चाहते हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान किसान वासुदेव नारायण यादव, बिंदेश्वरी यादव, किशोरी भगत, तेज नारायण भगत, और बैजू नारायण भगत समेत कई अन्य किसान अपने परिवारों के साथ मौजूद थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अपने हकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं करेंगे।







