
Bhagalpur News: विकास की धारा जब अपनी दिशा बदलती है, तो कहीं नए कल का सृजन करती है, तो कहीं पुरानी बुनियादों को हिला देती है। भागलपुर में गंगा की धारा मोड़ने की योजना भी कुछ ऐसा ही दोराहा बन खड़ी है, जहां शहर की प्यास बुझाने की कवायद गांवों के अस्तित्व पर सवाल उठा रही है।
नाथनगर के जाने-माने समाज सेवी गोल्डन मंडल ने भागलपुर में गंगा नदी की धारा को शहर की ओर मोड़ने की प्रशासनिक और सरकारी पहल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि यह प्रयास शहरी जनता की पेयजल और विकास संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है, तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। मंडल ने केंद्र और बिहार सरकार से आग्रह किया कि शहर के हित में आवश्यक कार्य अवश्य किए जाएं, परंतु ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
भागलपुर न्यूज़: गंगा की धारा बदलने से पहले ग्रामीण क्षेत्रों की चिंता
हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि गंगा की धारा में बदलाव से नदी किनारे बसे ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर बैरिया, रसद, रतीपुर, बैरिया पंचायत और शंकरपुर पंचायत को भारी नुकसान होने की आशंका है। सरकार को इस गंभीर पहलू को समझना होगा। पिछले वर्ष आई भीषण बाढ़ में रतीपुर-बैरिया पंचायत क्षेत्र में हुए गंगा कटाव ने कई किसानों की उपजाऊ कृषि भूमि को नदी में समाहित कर दिया था। बिना उचित सुरक्षा उपायों के यदि धारा परिवर्तन किया जाता है, तो भविष्य में इससे भी भयावह कटाव, विस्थापन और आजीविका का संकट उत्पन्न हो सकता है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
अतः, गोल्डन मंडल और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से सरकार के समक्ष कुछ स्पष्ट और न्यायसंगत मांगें रखी गई हैं। इन मांगों में प्रमुख है कि गंगा किनारे बसे गांवों की कटाव-रोधी सुरक्षा पहले सुनिश्चित की जाए, जिसमें मजबूत बांध, स्टोन पिचिंग और स्पर जैसे उपाय शामिल हों। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इसके साथ ही, किसानों की भूमि, घर और आजीविका की पूर्व सुरक्षा की गारंटी दी जानी चाहिए। उनकी अंतिम मांग है कि सुरक्षा कार्य पूर्ण होने के बाद ही गंगा की धारा को शहर की ओर ले जाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाए।
विकास की कीमत पर नहीं, सबको मिले न्यायपूर्ण समाधान
मंडल ने स्पष्ट कहा कि शहर की जनता हो या गांव की, दोनों ही भारत सरकार और बिहार सरकार की समान रूप से जिम्मेदारी हैं। विकास की कीमत किसी एक वर्ग की तबाही नहीं हो सकती। सरकार से अपेक्षा है कि वह संतुलित, न्यायपूर्ण और मानवीय निर्णय ले ताकि सभी वर्गों का हित सुरक्षित रह सके। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। उनकी मांग स्पष्ट है: जनता की सुरक्षा पहले, परियोजना बाद में। यह सिर्फ एक परियोजना नहीं, बल्कि हजारों जिंदगियों के भविष्य का सवाल है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।







