
Indian Army Jawan: जब एक बेटा तिरंगे में लिपटकर घर लौटता है, तो आंखें नम होती हैं लेकिन सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है। कुछ ऐसा ही मंजर भागलपुर के सबौर में देखने को मिला, जहां शहीद नीरज कुमार की अंतिम यात्रा में पूरा गांव उमड़ पड़ा।
देश की रक्षा में अपने प्राणों की आहुति देने वाले वीर सपूत नीरज कुमार का पार्थिव शरीर जैसे ही उनके पैतृक गांव सबौर के मिर्जापुर पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। माहौल में एक तरफ जहां अपने लाल को खोने का गम था, तो वहीं दूसरी ओर उसकी शहादत पर गर्व का भाव भी था। सेना के वाहन के गांव में प्रवेश करते ही हजारों की संख्या में लोग अपने वीर की अंतिम झलक पाने के लिए उमड़ पड़े। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गांव की गलियों में देशभक्ति और गम का एक मिला-जुला माहौल पसरा हुआ था।

जब घर पहुंचा Indian Army Jawan का पार्थिव शरीर
शहीद नीरज कुमार के घर के बाहर का दृश्य बेहद भावुक करने वाला था। उनके परिवार, जिसमें उनकी मां, पत्नी और दो छोटे-छोटे बच्चे शामिल हैं, का रो-रोकर बुरा हाल था। मां अपने बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर बार-बार बेसुध हो जा रही थीं, तो पत्नी की आंखों से आंसुओं की धारा रुकने का नाम नहीं ले रही थी। मासूम बच्चों को शायद यह समझ भी नहीं आ रहा था कि उनके सिर से पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है, लेकिन घर के माहौल ने उन्हें भी खामोश कर दिया था।
जैसे ही तिरंगे में लिपटे ताबूत को आंगन में रखा गया, वहां मौजूद हर किसी की आंखें छलक पड़ीं। इस गमगीन माहौल के बीच “भारत माता की जय” और “वीर जवान नीरज कुमार अमर रहे” के नारों से पूरा आसमान गूंज उठा। यह नारे न केवल शहीद के प्रति सम्मान थे, बल्कि देश के दुश्मनों के लिए एक ललकार भी थे।
भारत माता की जय के नारों से गूंजा इलाका
इस दुखद अवसर पर सबौर थाने की पुलिस और सेना के जवानों ने पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ शहीद को अंतिम सलामी दी। जब सैनिकों ने अपने साथी को श्रद्धांजलि देने के लिए हथियार झुकाए, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति भाव-विभोर हो गया। यह एक ऐसा क्षण था जब हर किसी के दिल में देश के लिए मर-मिटने वाले जवानों के प्रति सम्मान और गर्व की भावना चरम पर थी। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। गांव के हर घर से लोग निकलकर इस अंतिम यात्रा में शामिल हुए। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
बचपन से ही था देश सेवा का जज्बा
गांव के बड़े-बुजुर्गों ने बताया कि नीरज कुमार में बचपन से ही देश के प्रति कुछ कर गुजरने का जज्बा था। उनका एकमात्र सपना सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था, जिसे उन्होंने पूरा भी किया। उनके इस अंतिम सफर में सबौर थाना पुलिस के साथ-साथ औद्योगिक प्रक्षेत्र थाना जीरो माइल की पुलिस भी साथ चल रही थी, ताकि वीर सपूत की विदाई में कोई कमी न रह जाए।






