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मार्च, 3, 2026
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भागलपुर ने खोया अपना ‘माइकल’: जेपी आंदोलन के सेनानी और पूर्व पार्षद का निधन, शहर में शोक की लहर

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भागलपुर समाचार: 70 के दशक में जिसने सत्ता के खिलाफ क्रांति की मशाल जलाई, उस आवाज का आज अंत हो गया। भागलपुर ने अपने उस सपूत को खो दिया, जो आंदोलन की सड़कों से लेकर नगर निगम के सदन तक जनता की आवाज बनता रहा। जानिए कौन थे मनोज माइकल, जिनके निधन से शहर में शोक की लहर है।

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भागलपुर के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में एक जाना-पहचाना नाम, वीरेंद्र नारायण सिंह, जिन्हें लोग स्नेह से मनोज माइकल के नाम से जानते थे, अब हमारे बीच नहीं रहे। मंगलवार को 78 वर्ष की आयु में हृदय गति रुकने से उनका निधन हो गया। शहर के बूढ़ानाथ रोड स्थित उनके आवास पर जैसे ही यह दुखद सूचना पहुंची, शोक की लहर दौड़ गई और उनके अंतिम दर्शन के लिए लोगों का तांता लग गया।

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जेपी आंदोलन के प्रखर सेनानी

मनोज माइकल सिर्फ एक पूर्व पार्षद ही नहीं, बल्कि 1974 के ऐतिहासिक जेपी आंदोलन के एक प्रखर सेनानी भी थे। उन्होंने उस दौर में छात्रों और युवाओं के साथ मिलकर व्यवस्था के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। उनकी पहचान एक जुझारू और संघर्षशील व्यक्ति के रूप में थी, जो हमेशा आम लोगों के हक के लिए खड़े रहते थे।

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राजनीति में आने के बाद भी उन्होंने अपनी इस छवि को बरकरार रखा। एक पार्षद के रूप में उन्होंने अपने क्षेत्र की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और उनके समाधान के लिए लगातार प्रयासरत रहे। उनकी शख्सियत की कुछ खास बातें:

  • मूल नाम: वीरेंद्र नारायण सिंह
  • प्रसिद्ध नाम: मनोज माइकल
  • उम्र: 78 वर्ष
  • मुख्य पहचान: 1974 जेपी आंदोलन के सेनानी और पूर्व पार्षद
  • निधन का कारण: हृदय गति रुकना
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नम आंखों से दी अंतिम विदाई

उनके निधन की खबर फैलते ही शहर के कई गणमान्य लोग, राजनेता, और सामाजिक कार्यकर्ता उनके आवास पर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। बाद में उनकी अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। स्थानीय श्मशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया, जहां लोगों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को विदाई दी। मनोज माइकल का निधन भागलपुर के लिए एक बड़ी क्षति है, जिसे हमेशा उनके जुझारूपन और सामाजिक समर्पण के लिए याद किया जाएगा।

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