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Labour Code पर मचा घमासान, भागलपुर में मजदूरों ने मनाया ‘काला दिवस’, सरकार को दी सीधी चेतावनी

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Labour Code: सड़कें कोलतार से नहीं, बल्कि मजदूरों के गुस्से और काली पट्टियों से स्याह हो गईं। बुधवार को देश भर के मजदूरों ने ‘काला दिवस’ मनाते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भागलपुर के स्टेशन चौक पर विभिन्न मजदूर संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया और इस कानून को तत्काल वापस लेने की मांग की।

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Labour Code के खिलाफ क्यों उबला मजदूरों का गुस्सा?

देशव्यापी आह्वान के तहत भागलपुर के स्टेशन चौक पर विभिन्न मजदूर संगठनों के कार्यकर्ता और नेता एकत्रित हुए। उन्होंने अपनी बांहों पर काली पट्टी बांधकर नए लेबर कोड कानून के प्रति अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शन के दौरान माहौल पूरी तरह सरकार विरोधी नारों से गूंजता रहा। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र की मोदी सरकार को ‘विनाशकारी’ बताते हुए अविलंब इन चारों लेबर कोड को रद्द करने की जोरदार मांग उठाई।

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इस संयुक्त प्रदर्शन का नेतृत्व ऐक्टू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एसके शर्मा, एटक के जिला महासचिव डॉ. सुधीर शर्मा, सीटू के जिला सचिव दशरथ प्रसाद, और इंटक के जिला अध्यक्ष ई. रवि कुमार जैसे प्रमुख नेताओं ने किया। इनके अलावा, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी प्रदर्शन में शामिल होकर अपना समर्थन दिया, जिससे मजदूरों की आवाज को और मजबूती मिली। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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“यह कानून मजदूरों को गुलाम बना देगा”

प्रदर्शन के दौरान हुई सभा को संबोधित करते हुए मजदूर और किसान नेताओं ने सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया। वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि यह लेबर कोड कानून देश के मजदूरों को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल अपने कॉर्पोरेट मित्रों के फायदे के लिए काम कर रही है और देश को बर्बादी की ओर धकेल रही है।

नेताओं ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि ‘काला दिवस’ के माध्यम से मजदूर वर्ग सरकार को यह स्पष्ट संदेश दे रहा है कि उन पर किए जा रहे हर हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा, “ये चार लेबर कोड मजदूरों को मिले-जुले कानूनी अधिकारों को खत्म कर उन्हें गुलामी की जंजीरों में जकड़ देंगे और मालिकों की तानाशाही स्थापित करेंगे। यह कानून मजदूरों को सौ-डेढ़ सौ साल पीछे के अंधेरे युग में धकेलने की साजिश है।” देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी

वक्ताओं ने याद दिलाया कि 12 फरवरी 2026 को हुई आम हड़ताल में ही देश के मजदूरों ने इन कोडों को खारिज कर दिया था, लेकिन सरकार झूठा प्रचार कर इसे लागू करने पर अड़ी हुई है। उनका कहना था कि ये कोड ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के नाम पर पूंजीपतियों का मुनाफा बढ़ाने के लिए लाए गए हैं।

इस विरोध प्रदर्शन में ऐक्टू, एटक, सीटू, इंटक, सेवा और किसान संगठनों के कई प्रमुख नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए, जिनमें विष्णु कुमार मंडल, गोपाल राय, नेजाहत अंसारी, दीपक बाजोरिया, उजरा बानो, रणधीर यादव और महेश प्रसाद यादव जैसे नाम प्रमुख थे। यह एकजुटता आने वाले दिनों में आंदोलन के और तेज होने का संकेत है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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