

Bhagalpur Land Fraud Case: कानून के हाथ लंबे होते हैं, ये सुना तो सबने है, पर जब रसूखदारों के आगे यही हाथ जेब में चले जाएं तो इंसाफ की उम्मीद बेमानी लगने लगती है। भागलपुर के बहुचर्चित भूमि फर्जीवाड़ा मामले में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है, जहां डिप्टी सीएम के आदेश के बावजूद पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है।
क्या है पूरा Bhagalpur Land Fraud Case
यह पूरा मामला एक मृत महिला को कागजों पर जीवित दिखाकर जमीन का अवैध तरीके से नामांतरण कराने से जुड़ा है। जगदीशपुर थाना कांड संख्या 03/24 के सूचक सैयद ऐनाम उद्दीन ने पुलिस महानिरीक्षक (IG), पूर्वीय प्रक्षेत्र, भागलपुर को आवेदन देकर इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है। आरोप है कि सदर एसडीओ के आदेश पर 4 जनवरी 2024 को प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद, मुख्य अभियुक्त मो. इस्लाम और इस संगठित गिरोह में शामिल अन्य लोगों को अब तक गिरफ्तार नहीं किया गया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
शिकायतकर्ता के अनुसार, पुलिस की कार्यप्रणाली शुरू से ही संदिग्ध रही है। जब पुलिस 21 जनवरी को अभियुक्त के घर पहुंची, तो उसे बीमार बता दिया गया और पुलिस ने बिना किसी डॉक्टरी जांच के यह दलील मान ली। इसके बाद पुलिस कागजी कार्रवाई में ही उलझी रही, जिसका फायदा उठाकर अभियुक्त ने 30 जनवरी को पुलिस के दोबारा पहुंचने से ठीक पहले अदालत से अपनी गिरफ्तारी पर रोक का “नो-कोर्सिव एक्शन” आदेश प्राप्त कर लिया। यह सब तब हुआ जब सूबे के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा इस मामले में सख्त कार्रवाई के निर्देश दे चुके थे।
डिप्टी सीएम के निर्देश के बावजूद गिरफ्तारी क्यों नहीं?
इस मामले में पुलिस की 26 दिनों की देरी ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या पुलिस ने जानबूझकर अभियुक्तों को सबूत मिटाने और कानूनी दांव-पेंच का इस्तेमाल कर बचने का मौका दिया? शिकायतकर्ता सैयद ऐनाम उद्दीन ने अपनी जान-माल को खतरा बताते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) से सुरक्षा की गुहार भी लगाई थी, लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि इस तरह के फर्जी शपथपत्र के आधार पर भूमि का नामांतरण कैसे संभव हुआ और इसमें कौन-कौन से सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब इस पूरे प्रकरण को आईजी विवेक कुमार ने गंभीरता से लिया है।आईजी ने मामले की जांच का जिम्मा सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह को सौंपते हुए जल्द ही इसकी समीक्षा करने की बात कही है। अब देखना यह होगा कि क्या इस संगठित फर्जीवाड़े की परतों को खोलने के लिए SIT का गठन होता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। फिलहाल, पीड़ित पक्ष न्याय की उम्मीद में आला अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है और पूरा मामला पुलिस की सुस्त कार्यशैली की भेंट चढ़ता दिख रहा है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।


