

AI Summit: जब दिल्ली के भारत मंडपम में भविष्य की तकनीक पर दुनिया मंथन कर रही थी, तब कुछ लोगों ने राजनीतिक नारेबाजी का शोर मचाकर इस वैश्विक मंच की गरिमा को ठेस पहुंचाने की कोशिश की। देश की राजधानी नई दिल्ली में आयोजित एक प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान हुए इस हंगामे पर अब बिहार के भागलपुर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है, जहां वकीलों ने इसे देश की छवि पर हमला बताया है।
भागलपुर के अधिवक्ताओं ने भारत मंडपम में हुए इस पूरे घटनाक्रम को “घोर निंदनीय” करार दिया है। उनका कहना है कि जब दुनिया भर के प्रतिनिधि भारत की तकनीकी शक्ति को देखने आए हों, तब इस तरह का राजनीतिक प्रदर्शन देश के सम्मान को धूमिल करता है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि आज के युग में सूचना प्रौद्योगिकी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस देश की प्रगति की रीढ़ हैं और ऐसे महत्वपूर्ण विषयों पर हो रहे आयोजनों में राजनीति के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
AI Summit में क्यों हुआ राजनीतिक प्रदर्शन?
जानकारी के अनुसार, नई दिल्ली के भारत मंडपम में जब कार्यक्रम चल रहा था, उसी समय कांग्रेस से जुड़े कुछ कार्यकर्ता आयोजन स्थल के पास पहुंच गए और नारेबाजी करने लगे। इस दौरान कार्यक्रम में देश-विदेश के कई महत्वपूर्ण प्रतिनिधि मौजूद थे, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे। इस घटना ने न केवल आयोजन में एक संक्षिप्त व्यवधान डाला, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मेहमानों के सामने एक असहज स्थिति भी पैदा कर दी। भागलपुर के वकीलों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे वैश्विक मंचों का उद्देश्य तकनीकी सहयोग, नवाचार और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा देना होता है, न कि राजनीतिक स्वार्थ साधना।
इस घटनाक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी चर्चाओं का बाजार गर्म है। कई लोगों का मानना है कि राजनीतिक विरोध दर्ज कराने के और भी मंच हो सकते हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय आयोजन को इसके लिए चुनना सरासर गलत है। भारत जिस तेजी से डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में अपनी पहचान बना रहा है, उसे देखते हुए इस तरह की घटनाएं विकास की गति को प्रभावित कर सकती हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
‘पहले राष्ट्र, फिर राजनीति’: वकीलों का कड़ा रुख
भागलपुर के विधि विशेषज्ञों ने एक सुर में कहा, “पहले राष्ट्र है, उसके बाद राजनीति।” उनका मानना है कि जब देश की प्रतिष्ठा दांव पर हो, तो सभी राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एकजुट होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हंगामा भारत की बढ़ती साख को नुकसान पहुंचाने का एक प्रयास है।
अधिवक्ताओं ने आगे कहा कि भारत सरकार देश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे में एआई जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन में किसी भी तरह का व्यवधान डालना सीधे तौर पर देशहित के विरुद्ध है। यह केवल एक कार्यक्रम का अपमान नहीं, बल्कि उन सभी विशेषज्ञों का भी अपमान है जो भारत के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए अपना योगदान देने आए थे। इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि राजनीतिक विरोध की सीमाएं क्या होनी चाहिए।




