Commonwealth Speakers Conference: संसद के गलियारों में जब दुनिया भर के लोकतांत्रिक मूल्यों के पहरेदार जुटते हैं, तो समझो भविष्य के लोकतंत्र की नई इबारत लिखी जा रही है। ऐसे ही एक महत्वपूर्ण पल का गवाह बना देश की राजधानी दिल्ली, जहां 28वें राष्ट्रमंडल अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन का भव्य आगाज़ हुआ।
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने इस गरिमामय समारोह में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को सुबह 10 बजे सेंट्रल हॉल, संविधान सदन, संसद भवन परिसर, नई दिल्ली में आयोजित इस उद्घाटन समारोह की शोभा भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति ने और बढ़ा दी। यह सम्मेलन संसदीय परंपराओं और लोकतांत्रिक सिद्धांतों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उद्घाटन के पश्चात, सांसद अजय कुमार मंडल संविधान सदन से बाहर निकले और संसद प्रांगण में लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर उनके साथ बिहार विधानसभा के अध्यक्ष प्रेम कुमार भी मौजूद थे। दोनों गणमान्य व्यक्तियों ने विभिन्न प्रदर्शित विषयों और स्टॉलों का गहन निरीक्षण किया, जो संसदीय कार्यप्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं को उजागर कर रहे थे।
Commonwealth Speakers Conference: लोकतंत्र की मजबूती पर चिंतन
माननीय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला जी की अध्यक्षता में आयोजित यह सम्मेलन वैश्विक लोकतंत्र के लिए एक बड़ा मंच है। इसमें 42 राष्ट्रमंडल देशों और चार अर्ध-स्वायत्त विधानसभाओं से कुल 61 स्पीकर्स तथा अन्य पीठासीन अधिकारियों ने भाग लिया। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इस अवसर पर राज्यसभा के माननीय उपसभापति श्री हरिवंश जी, अंतर-संसदीय संघ (IPU) की अध्यक्ष डॉ. तुलिया ऐक्सन, कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष श्री क्रिस्टोफर कालिला जैसे कई विशिष्ट अतिथि भी उपस्थित थे। यह सभी गणमान्य अतिथि वैश्विक संसदीय चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श के लिए एकत्र हुए हैं।
यह सम्मेलन समकालीन संसदीय विषयों पर गहन विचार-विमर्श करेगा। इनमें लोकतांत्रिक संस्थाओं को सुदृढ़ करने में पीठासीन अधिकारियों की भूमिका, संसदीय कार्यप्रणाली में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग, सांसदों पर सोशल मीडिया के प्रभाव, तथा मतदान से आगे नागरिक सहभागिता बढ़ाने के नवाचारी उपाय शामिल हैं। ये सभी मुद्दे सीधे तौर पर संसदीय लोकतंत्र के भविष्य और उसकी प्रभावशीलता से जुड़े हैं।
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भविष्य के लोकतंत्र की दिशा तय करते महत्वपूर्ण विषय
सम्मेलन में चर्चा किए जाने वाले विषय वर्तमान समय की आवश्यकताओं को दर्शाते हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग किस तरह से संसदीय प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और पारदर्शी बना सकता है, इस पर गहन मंथन होगा। वहीं, सोशल मीडिया के युग में सांसदों की भूमिका और नागरिकों को केवल मतदान तक सीमित न रखकर उन्हें नीति निर्माण में और अधिक सक्रिय रूप से कैसे शामिल किया जाए, इन पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
यह सम्मेलन न केवल विभिन्न देशों के पीठासीन अधिकारियों को अपने अनुभव साझा करने का अवसर प्रदान करेगा, बल्कि यह वैश्विक लोकतांत्रिक संवाद को भी मजबूत करेगा। भागलपुर सांसद श्री अजय कुमार मंडल की इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर उपस्थिति बिहार और देश के लिए गौरव का विषय है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। इससे वैश्विक संसदीय समुदाय में भारत की भूमिका और सशक्त होगी।

