
भागलपुर न्यूज़: गंगा नदी की धारा को मोड़ने के लिए चल रही बड़ी सरकारी कवायद पर अब सीधा सवाल उठ गया है. ये सवाल किसी और ने नहीं, बल्कि खुद इलाके के सांसद ने उठाया है, जिन्होंने इस पूरी परियोजना को ‘फिजूल’ बताकर एक नई बहस छेड़ दी है. आखिर क्यों अपने ही क्षेत्र के इतने बड़े प्रोजेक्ट पर जनप्रतिनिधि ने ऐसी तल्ख़ टिप्पणी की?
मामला बिहार के भागलपुर का है, जहां सांसद अपने संसदीय क्षेत्र के दौरे पर थे. इसी क्रम में जब वे बैरिया इलाके में पहुंचे, तो उन्होंने गंगा नदी की धारा को मोड़ने की योजना पर अपनी बेबाक राय रखी. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह प्रयास और इस पर होने वाला खर्च पूरी तरह से फिजूल है. उनके इस बयान के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है.
परियोजना को बताया जनता के पैसे की बर्बादी
सांसद ने इस योजना की व्यावहारिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि गंगा जैसी विशाल नदी की प्राकृतिक धारा को मोड़ना न तो आसान है और न ही इसका कोई ठोस नतीजा निकलने वाला है. उनके अनुसार, इस तरह की योजनाओं पर भारी-भरकम सरकारी रकम खर्च करना जनता के पैसे की बर्बादी के सिवा और कुछ नहीं है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस पैसे का इस्तेमाल क्षेत्र की अन्य जरूरी विकास योजनाओं में किया जा सकता था, जिससे आम लोगों को सीधा फायदा मिलता.
यह बयान उस समय आया है जब वे क्षेत्र में लोगों की समस्याओं को सुनने और विकास कार्यों का जायजा लेने के लिए दौरे पर थे. माना जा रहा है कि स्थानीय लोगों से मिले फीडबैक और जमीनी हकीकत को देखने के बाद ही उन्होंने यह टिप्पणी की है.
आखिर क्यों हो रहा है धारा मोड़ने का प्रयास?
उल्लेखनीय है कि गंगा नदी के कटाव और बाढ़ की समस्या भागलपुर के कई इलाकों के लिए एक बड़ी चुनौती रही है. हर साल नदी का बदलता रुख कई गांवों के लिए खतरा पैदा करता है. इसी समस्या से निपटने के लिए नदी की धारा को नियंत्रित करने और उसे एक निश्चित दिशा देने के उद्देश्य से इस परियोजना पर विचार किया जा रहा है. सरकार का मानना है कि इससे कटाव को रोकने में मदद मिलेगी और आबादी वाले क्षेत्रों को सुरक्षित किया जा सकेगा.
हालांकि, सांसद के इस बयान ने परियोजना के समर्थकों और विरोधियों के बीच एक नई बहस को जन्म दे दिया है. एक तरफ जहां सरकारी विभाग इसे कटाव की समस्या का स्थायी समाधान मान रहे हैं, वहीं अब खुद जनप्रतिनिधि ने इसकी उपयोगिता को कटघरे में खड़ा कर दिया है. अब देखना यह होगा कि सांसद की इस टिप्पणी के बाद इस परियोजना का भविष्य क्या रुख लेता है.






