

Bhagalpur News: शहर की रफ्तार पर अक्सर सियासत और सरकारी फाइलों का ब्रेक लग जाता है। कुछ ऐसा ही भागलपुर के भीखनपुर में हो रहा है, जहां विकास की सीढ़ी बनने वाला अंडरपास, भविष्य के जाम का नक्शा बनाता दिख रहा है। स्थानीय लोगों की चिंता अब सांसद की चिट्ठी बनकर रेल प्रबंधक के दफ्तर तक पहुंच गई है।
Bhagalpur News: क्या है पूरा मामला और क्यों उठी आपत्ति?
भागलपुर के सांसद अजय कुमार मंडल ने मालदा रेल प्रबंधक को एक पत्र लिखकर एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर ध्यान आकर्षित किया है। यह मामला भागलपुर के घनी आबादी वाले भीखनपुर क्षेत्र में गुमटी नंबर एक और दो पर रेलवे द्वारा बनाए जा रहे अंडरपास से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने इस निर्माण कार्य के डिजाइन पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जिसके बाद सांसद ने यह कदम उठाया है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
पत्र के अनुसार, निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास की ऊंचाई और चौड़ाई बेहद सीमित रखी जा रही है, जो किसी भी मानक पर खरी नहीं उतरती। भीखनपुर क्षेत्र, जहाँ लगभग 2 लाख लोग निवास करते हैं, के लिए इतना संकीर्ण अंडरपास भविष्य में यातायात के लिए एक बड़ी मुसीबत बन सकता है। लोगों का तर्क है कि इस डिजाइन से हर दिन भयंकर जाम लगेगा, जिससे अव्यवस्था फैलेगी और जनसुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा पैदा होगा। इससे पहले, स्थानीय लोगों ने एक हस्ताक्षरित पत्र सांसद को सौंपकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/
सांसद ने पत्र में क्या रखी प्रमुख मांगें?
सांसद अजय कुमार मंडल ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से कहा है कि मौजूदा डिजाइन अव्यवहारिक है और इससे आम लोगों का जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने चिंता जताई कि किसी भी आपातकालीन स्थिति में इस संकरे अंडरपास से एम्बुलेंस, दमकल वाहन या अन्य जरूरी सेवाओं की गाड़ियों का निकलना लगभग असंभव हो जाएगा। यह एक छोटी सी चूक भविष्य में किसी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
उन्होंने मालदा रेल प्रबंधक से आग्रह किया है कि जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इस अंडरपास के डिजाइन की तत्काल समीक्षा की जाए। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। सांसद ने मांग की है कि इसे मानक आकार के अनुसार पुनः डिजाइन कर निर्माण कार्य कराया जाए, ताकि यह अंडरपास सुविधा देने की जगह असुविधा का केंद्र न बन जाए। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।




