
भागलपुर: शहर की सड़कों को रोशन करने के लिए खजाने में करोड़ों रुपये आ तो गए, लेकिन रौशनी का इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ है. एक तरफ जहां नगर निगम को 23 करोड़ से ज़्यादा का फंड मिला है, वहीं दूसरी तरफ टेंडर की उलझनों ने पूरे मामले को लटका दिया है. सवाल यह है कि जब पैसा है, तो फिर शहर अंधेरे में क्यों है?
करोड़ों का फंड, फिर भी समाधान दूर
भागलपुर नगर निगम को एक बड़ी वित्तीय राहत मिली है. सरकार की ओर से निगम के खाते में 23.33 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है. इस फंड का मुख्य उद्देश्य शहर में विकास कार्यों को गति देना और नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाना है. इसमें सबसे प्रमुख काम सड़कों पर प्रकाश की व्यवस्था को दुरुस्त करना था, जो लंबे समय से खस्ताहाल है. लेकिन यह बड़ी रकम भी फिलहाल शहरवासियों को कोई फौरी राहत देती नहीं दिख रही है.
टेंडर प्रक्रिया में फंसा पेंच
जानकारी के अनुसार, फंड मिलने के बावजूद स्ट्रीट लाइट का प्रबंधन अधर में लटका हुआ है. इसका मुख्य कारण टेंडर प्रक्रिया में चल रही कथित गड़बड़ियां और देरी है. सूत्रों का कहना है कि टेंडर को लेकर चल रहे ‘खेल’ की वजह से किसी भी एजेंसी को अंतिम रूप से काम नहीं सौंपा जा सका है. इस प्रशासनिक देरी का सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ रहा है, जहां कई इलाकों में शाम ढलते ही अंधेरा पसर जाता है.
निगम प्रशासन के सामने अब दोहरी चुनौती है. एक तरफ फंड का सही समय पर इस्तेमाल करना है, तो दूसरी तरफ टेंडर प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से पूरा करना है. जब तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक शहर की सड़कों को रोशन करने की योजना कागजों तक ही सीमित रहेगी.
शहरवासियों की बढ़ीं मुश्किलें
सड़कों पर अंधेरा होने से आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं. इससे न सिर्फ दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है, बल्कि आपराधिक घटनाओं की आशंका भी बढ़ जाती है. शहरवासियों को उम्मीद थी कि फंड मिलने के बाद निगम तेजी से काम करेगा और उन्हें इस समस्या से निजात मिलेगी. लेकिन फिलहाल उनकी उम्मीदें पूरी होती नहीं दिख रही हैं.
- शहर के कई प्रमुख मार्गों पर स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं.
- अंधेरे के कारण रात में महिलाओं और बुजुर्गों का निकलना असुरक्षित हो गया है.
- स्थानीय लोग कई बार इस समस्या को लेकर शिकायत कर चुके हैं.
अब देखना यह होगा कि नगर निगम प्रशासन इस टेंडर की उलझन को कब तक सुलझा पाता है और भागलपुर के लोगों को अंधेरी सड़कों से कब तक मुक्ति मिलती है.





