
Women Empowerment Bihar: एक दिया जो खुद जला, उसने कई अंधेरे घरों में रौशनी भर दी। बिहार के भागलपुर से रेखा देवी की कहानी ऐसे ही संघर्ष और सशक्तिकरण की मिसाल है, जो दिखाती है कि कैसे एक चिंगारी पूरे समाज को रोशन कर सकती है। नीतीश कुमार के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा बिहार न केवल विकास की नई गाथा लिख रहा है, बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी अनेकों प्रेरक कहानियां रच रहा है। भागलपुर जिले के आकांक्षी प्रखंड पीरपैंती की प्यालपुर पंचायत, गोकुल मथुरा निवासी रेखा देवी, जो जीविका के दम पर दर्जनों महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर पूरे इलाके में ‘रोजगार देने वाली दीदी’ के नाम से मशहूर हैं।
Women Empowerment Bihar: रेखा दीदी की अगुवाई में बदली महिलाओं की तकदीर
कभी रेखा के पति गुजरात में मजदूरी करते थे, जिससे घर चलाना बहुत मुश्किल था। बिना छत का घर, दो जून की रोटी के लिए जद्दोजहद, फिर भी हिम्मत नहीं हारी। जीविका से प्रेरित होकर उन्होंने गांव में ही स्वयं सहायता समूह बनाया और उसकी नेतृत्वकर्ता बनकर अन्य महिलाओं को जोड़ने लगीं। यह उनकी अटूट भावना का प्रमाण है कि विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने न केवल अपने लिए, बल्कि अपने जैसी कई और महिलाओं के लिए आशा का मार्ग प्रशस्त किया।
नीतीश सरकार की जीविका योजना ने रेखा दीदी जैसे लाखों महिलाओं को पंख दिए हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। अब तक रेखा दीदी ने करीब 30 महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। पीएमएफएमई योजना और कृषि विश्वविद्यालय सबौर से प्रशिक्षण दिलाकर उन्होंने महिलाओं को चाय स्टॉल, मशरूम उत्पादन, और पकोड़े-सत्तू की दुकानें स्थापित करने में मदद की। यही नहीं, मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से 10 हजार रुपये की सहायता से बकरी पालन को भी प्रोत्साहित किया, जिससे कई दीदियों को बकरियां तक खरीद कर मिलीं और वे अपनी आजीविका चलाने में सक्षम हो सकीं।आज गोकुल मथुरा में रेखा दीदी एक सफल मशरूम उत्पादन यूनिट चला रही हैं, जहां 10 से 12 महिलाएं नियमित रूप से रोजगार पा रही हैं। अगर मशरूम की बिक्री में कमी आती है, तो वे उसका अचार बनाकर बेचती हैं, जो उनकी व्यावसायिक सूझबूझ को दर्शाता है। खास बात यह है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर और विधवा महिलाओं को प्राथमिकता देती हैं, उन्हें जीविका से लोन दिलाने में भी मदद करती हैं। यह सिर्फ रोजगार नहीं, यह तो ग्रामीण उद्यमिता की एक नई गाथा है, जो सामाजिक उत्थान का भी मार्ग प्रशस्त कर रही है।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
रेखा दीदी की मेहनत का ही परिणाम है कि पूजा, जिसे गांव में कोई पूछता नहीं था और सास ताने मारती थीं, आज आत्मनिर्भर है। रेखा दीदी ने उसे जीविका से जोड़ा, जिससे उसने 10 हजार रुपये का लोन लेकर सिलाई मशीन खरीदी। आज वह मशरूम यूनिट में भी काम कर अच्छी कमाई कर रही है। उसी तरह शिल्पी दीदी, जिन्हें दो वक्त का खाना मुश्किल था, उन्होंने भी जीविका से लोन लेकर पहले आटा चक्की लगाई, फिर 1 लाख रुपये के निवेश से चना-सत्तू उत्पादन शुरू किया। ये महिलाएं अपनी सफलता का श्रेय नीतीश जी और मोदी जी के प्रयासों को देती हैं, जिन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अद्भुत काम किया है। पूजा और शिल्पी दीदी जैसी दर्जनों महिलाएं आज रेखा दीदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रही हैं और अन्य महिलाओं को प्रेरित कर रही हैं। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।जीविका के बीपीएम दीपक कुमार बताते हैं, ‘मुख्यमंत्री रोजगार योजना के तहत महिलाओं को समूहों में जोड़कर प्रशिक्षण और लोन देते हैं। आत्मनिर्भर महिलाएं लोन समय पर लौटाती हैं, जो इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है।’ रेखा दीदी की कहानी महिला सशक्तिकरण का जीता-जागता प्रमाण है। नीतीश सरकार की योजनाओं से न सिर्फ रोजगार मिला, बल्कि इन महिलाओं को समाज में सम्मान भी हासिल हुआ है। आज वे अपने उत्पाद दूसरे शहरों तक भेज रही हैं, और पीरपैंती की कई असहाय महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: यह एक ऐसी क्रांति है, जो बिहार के गांवों में चुपचाप फैल रही है और अनगिनत जिंदगियों में बदलाव ला रही है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।



