
Bhagalpur News: सियासत की सुर्खियों से इतर जब इतिहास के पन्ने पलटते हैं, तो कुछ गुमनाम नायक ऐसे मिलते हैं जिनकी दी हुई रोशनी से आज भी शहर रौशन है। भागलपुर के एक ऐसे ही महानायक, बाबू दीप नारायण सिंह, को उनकी जयंती की पूर्व संध्या पर याद किया गया, जिन्होंने अपना सर्वस्व इस शहर को समर्पित कर दिया। गांधी शांति प्रतिष्ठान केंद्र द्वारा आयोजित ‘स्मृति दिवस समारोह’ में उनके अतुलनीय योगदान पर चर्चा हुई।
डॉ. सुनील अग्रवाल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि बाबू दीप नारायण सिंह उन महान विभूतियों में से थे, जिन्होंने अपनी संपत्ति और अपनी पूरी ज़िंदगी बिना किसी स्वार्थ के देश और समाज को अर्पित कर दी। उनके त्याग का ही फल है कि आज भागलपुर शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में जाना जाता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में अंतरराष्ट्रीय गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति डॉ. मनोज कुमार और मुख्य वक्ता के रूप में टीएनबी कॉलेज के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी शामिल हुए।
Bhagalpur News: दीप नारायण सिंह के योगदान को किया गया याद
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बाबू दीप नारायण सिंह जैसे महान स्वतंत्रता सेनानी के योगदान को न केवल याद करने, बल्कि उसे आज की पीढ़ी तक पहुंचाने की भी सख्त ज़रूरत है। उनके द्वारा स्थापित की गई संस्थाएं और दान में दी गई संपत्तियां आज भी भागलपुर की धरोहर हैं, लेकिन समय के साथ उनकी स्थिति बिगड़ रही है। इस कार्यक्रम का संचालन संजय कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रकाश चंद्र गुप्ता द्वारा किया गया।
आधुनिक भागलपुर के ‘कर्ण’ थे बाबू दीप नारायण
मुख्य वक्ता डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी ने बाबू दीप नारायण सिंह को ‘आधुनिक भागलपुर का कर्ण’ बताते हुए उनके जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि दीप नारायण सिंह ने दो प्रमुख राष्ट्रीय आंदोलनों, 1905 के स्वदेशी आंदोलन और 1920 के असहयोग आंदोलन में न केवल हिस्सा लिया, बल्कि उनका नेतृत्व भी किया। 1920 में महात्मा गांधी से मिलने के बाद उन्होंने आजीवन खादी पहनने का प्रण लिया था।
डॉ. चौधरी ने बताया कि लाला लाजपत राय के विचारों से वे बहुत प्रभावित थे। यही कारण था कि 1928 में जब लाला जी का निधन हुआ, तो उन्होंने उनके सम्मान में अपनी 32 एकड़ ज़मीन ‘लाजपत पार्क’ के लिए दान कर दी। इतना ही नहीं, 1934 के विनाशकारी मुंगेर भूकंप के बाद महात्मा गांधी ने खुद कहा था कि दरभंगा महाराज के बाद अगर किसी ने भूकंप पीड़ितों के लिए सबसे बड़ा दान दिया, तो वे बाबू दीप नारायण सिंह थे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। आज उनकी यादों से जुड़ी कई धरोहरें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं, जिनके संरक्षण की तत्काल आवश्यकता है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।
विचारों को संकलित कर पुस्तक प्रकाशित करने की घोषणा
मुख्य अतिथि डॉ. मनोज कुमार ने कहा कि बाबू दीप नारायण सिंह के कार्यों और विचारों को संकलित कर एक पुस्तक का रूप दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति का सम्मान नहीं, बल्कि इसके बहाने भागलपुर के उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद करने का अवसर मिलेगा, जिन्हें इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। उन्होंने ज़िला प्रशासन और नगर निगम से यह मांग करने का भी सुझाव दिया कि दीप बाबू द्वारा दान दी गई संपत्तियों का उपयोग उन्हीं उद्देश्यों के लिए हो, जिनके लिए वे दी गई थीं।
कार्यक्रम के अंत में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि बाबू दीप नारायण सिंह के जीवन और विचारों पर एक विस्तृत पुस्तक तैयार की जाएगी, जिसे 26 जनवरी 2027 को प्रकाशित किया जाएगा। इसकी ज़िम्मेदारी डॉ. रवि शंकर कुमार चौधरी और डॉ. उमेश प्रसाद नीरज को सौंपी गई। इस अवसर पर डॉ. मनोज मिता, प्रकाश चंद्र गुप्ता, राम रतन चूड़ीवाला, वासुदेव भाई, डॉ. अरविंद कुमार, और मोहम्मद तकी अहमद जावेद समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित थे।





