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दिसम्बर, 13, 2025

भागलपुर में खनन माफिया पर लगेगी लगाम? बालू घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया फिर शुरू

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सालों से अटकी पड़ी प्रक्रिया, माफियाओं की चांदी और सरकार को राजस्व का चूना. लेकिन अब खेल बदलने वाला है. भागलपुर में बालू घाटों की बंदोबस्ती को लेकर प्रशासन ने ऐसा कदम उठाया है कि खनन माफिया में हड़कंप मचना तय है.

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भागलपुर जिले में लंबे समय से रुकी हुई बालू घाटों की बंदोबस्ती की प्रक्रिया को जिला प्रशासन ने हरी झंडी दे दी है. इस फैसले से जहां एक ओर सरकारी खजाने को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर अवैध बालू खनन के कारोबार पर भी लगाम लगने की संभावना है. खनन विभाग ने प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के लिए कमर कस ली है.

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गौरतलब है कि बंदोबस्ती प्रक्रिया के रुके होने के कारण जिले में अवैध खनन की गतिविधियां काफी बढ़ गई थीं. इससे न केवल सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि पर्यावरण को भी गंभीर क्षति पहुंच रही थी. अब प्रक्रिया के दोबारा शुरू होने से इन सभी समस्याओं पर अंकुश लगाया जा सकेगा.

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अवैध खनन रोकने को लेकर प्रशासन सख्त

बंदोबस्ती प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने और किसी भी तरह की धांधली को रोकने के लिए प्रशासन ने एक विशेष जांच अभियान चलाने का भी निर्णय लिया है. इस अभियान के तहत जिले के सभी बालू घाटों की गहन जांच की जाएगी और अवैध खनन में लिप्त लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

सूत्रों के अनुसार, यह जांच अभियान पूरी पारदर्शिता के साथ चलाया जाएगा. इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध और पात्र लोगों को ही खनन का अधिकार मिले, जिससे माफियाओं के नेटवर्क को तोड़ा जा सके.

बंदोबस्ती प्रक्रिया से होंगे कई फायदे

बालू घाटों की बंदोबस्ती एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत सरकार खनन के लिए घाटों को ठेके पर देती है. इस प्रक्रिया के फिर से शुरू होने से कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

  • राजस्व में वृद्धि: सरकार को रॉयल्टी के रूप में एक बड़ा राजस्व प्राप्त होगा.
  • अवैध खनन पर रोक: कानूनी तौर पर खनन होने से अवैध कारोबार पर लगाम लगेगी.
  • रोजगार के अवसर: वैध खनन से जुड़े कामों में स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे.
  • नियंत्रित कीमतें: बाजार में बालू की उपलब्धता बढ़ेगी, जिससे निर्माण कार्यों के लिए इसकी कीमतों पर नियंत्रण पाया जा सकेगा.
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प्रशासन के इस कदम को जिले में खनन व्यवस्था को पटरी पर लाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है. अब देखना यह होगा कि यह प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और इसका जमीनी स्तर पर कितना असर देखने को मिलता है.

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