
Bhagalpur News: जब विकास की ऊंची मीनारें शहरों में सिमट रही हैं, तब भागलपुर में गांधी के सपनों का भारत एक बार फिर जीवंत हो उठा, जहां गांव की आत्मा और गण की शक्ति पर गहरा मंथन हुआ। कला केंद्र में पीस सेंटर परिधि द्वारा आयोजित “गांव, गांधी और गण” विषयक संगोष्ठी में वक्ताओं ने बेबाकी से अपनी राय रखी। यह आयोजन 26 जनवरी से शुरू हुए ‘गणतंत्र से गांधी’ अभियान का हिस्सा था, जिसका समापन 30 जनवरी को गांधी शहादत दिवस पर होगा।कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए उदय ने विषय प्रवेश कराया और कहा कि गांधी की हत्या पूरी दुनिया के लिए एक शर्मनाक घटना है। यह केवल एक व्यक्ति की हत्या नहीं थी, बल्कि भारत निर्माण के उस ब्लूप्रिंट पर हमला था जिसे गांधी ने अपनी किताब ‘हिंद स्वराज’ में प्रस्तुत किया था। उन्होंने न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया को जलवायु संकट और इकोलॉजिकल असंतुलन से बचाने के लिए विकास का एक वैकल्पिक रास्ता दिखाया था। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
Bhagalpur News: क्या थी गांधी की भारत निर्माण की ब्लूप्रिंट?
संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे गांधी हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति डॉ. मनोज ने कहा कि गांधी के लिए भारत का अर्थ गांव था। वे कहते थे कि भारत की आत्मा गांवों में बसती है। उनके लिए गांव का मतलब सहयोग, सामूहिकता, सादगी और संवेदना का केंद्र था। उन्होंने भारत के वास्तविक विकास के लिए ग्राम स्वराज की कल्पना की थी, जिसका उद्देश्य सत्ता को जमीनी स्तर पर मजबूत करना था।
डॉ. मनोज ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आजादी के समय जहां केवल 17-18% आबादी शहरों में थी, वहीं आज यह आंकड़ा 32% को पार कर गया है। नीति आयोग का अनुमान है कि 2030 तक 40% आबादी शहरी हो जाएगी। उन्होंने कहा कि गांधी की हत्या केवल एक राजनीतिक या सांस्कृतिक सोच की हत्या नहीं, बल्कि गांव और ग्राम स्वराज की अवधारणा की भी हत्या थी।पत्रकार प्रसून लतांत ने ‘गण’ शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इसके केंद्र में हमेशा लोग और समुदाय थे। भारतीय संदर्भ में गणतंत्र का अर्थ केवल लोगों का शासन नहीं, बल्कि समुदायों के संघ की सत्ता है। इसी आधार पर हम गांव गणराज्य की बात करते हैं, जहां सत्ता का विकेंद्रीकरण होता है।
लोकतंत्र और गणराज्य पर वक्ताओं के तीखे विचार
संगोष्ठी में अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। मो. शाहबाज ने कहा कि गांधीजी कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देकर देश को स्वावलंबी बनाना चाहते थे। संजय कुमार ने गांधी के सद्भावना और समभाव के संदेश को याद किया। वहीं, डॉ. हबीब मुर्शिद खां ने कहा कि देश में कुछ लोग सत्ता पाने के लिए घृणा का सहारा ले रहे हैं, लेकिन हम गांव और गांधी के विचार को कमजोर नहीं होने देंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उज्ज्वल घोष ने कहा कि गांव से गांधी का सोच लेकर ही सही गणतंत्र का निर्माण हो सकता है।अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में डॉ. मनोज ने सवाल उठाया कि क्या गांधी की हत्या अचानक हुई थी? उन्होंने बताया कि गांधी पर सात से अधिक बार हत्या के प्रयास हुए क्योंकि वे सभी के लिए बराबरी और सम्मान की बात करते थे। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता और गणतंत्र हमारे स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा हमें सौंपी गई एक जिम्मेदारी है, और इसके मूल्यों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
गांधी की शहादत और हमारी जिम्मेदारी
कार्यक्रम का संचालन करते हुए राहुल ने कहा कि भारत विभिन्न संस्कृतियों और भाषाओं का एक समुच्चय है। हमने एक-दूसरे से वादा किया था कि जाति, धर्म, लिंग या भाषा के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होगा, और इसी विचार की रक्षा के लिए गांधीजी ने अपनी शहादत दी। आज जब इस विचार पर खतरा है, तो हमें और भी सजग रहने की जरूरत है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें: https://deshajtimes.com/news/national/। इस मौके पर डॉ. मनोज, संजय कुमार, मो. बाकिर हुसैन, मृदुला सिंह, उज्जवल घोष, मो. शाहबाज, प्रसून लतांत, और हबीब मुर्शिद खान समेत कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के तहत 30 जनवरी को गनौरा मोहनपुर, मक्का तकिया नवगछिया, और कागजी टोला कहलगांव में भी आयोजन किए जाएंगे। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।





