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मार्च, 3, 2026
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Bhagalpur News: ‘स्मार्ट सिटी’ का बस स्टैंड बना ‘नरक’, लाखों की कमाई पर बदहाली भारी, यात्री बोले- कौन है जिम्मेदार?

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Bhagalpur News: ‘स्मार्ट सिटी’ का चोला ओढ़े भागलपुर की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो तमाम सरकारी दावों की पोल खोलकर रख देती है। शहर को स्मार्ट सिटी का तमगा तो मिल गया, लेकिन यहां का सरकारी बस स्टैंड बदहाली और अव्यवस्था की जीती-जागती मिसाल बन गया है। आलम यह है कि यहां से गुजरने वाले हजारों यात्री हर दिन नारकीय परिस्थितियों का सामना करने को मजबूर हैं।

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भागलपुर के तिलकामांझी स्थित सरकारी बस अड्डे की हालत देखकर यह यकीन करना मुश्किल हो जाता है कि यह उसी शहर का हिस्सा है जिसे एक स्मार्ट सिटी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। यहां कदम रखते ही गंदगी और कूड़े के ढेर आपका स्वागत करते हैं। यात्रियों के लिए न तो पीने के साफ पानी की कोई व्यवस्था है और न ही स्वच्छ शौचालय की सुविधा। बैठने के लिए बनी-बनाई जगहें भी टूट-फूट चुकी हैं, जिसके चलते लोगों को मजबूरन जमीन पर या खुले आसमान के नीचे खड़े होकर बसों का इंतजार करना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

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Bhagalpur News: मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव, यात्री बेहाल

बस अड्डे का पूरा परिसर कूड़े-कचड़े से पटा पड़ा है। सरकार द्वारा हाल ही में उपलब्ध कराई गईं नई और पिंक बसें भी इसी गंदगी के अंबार के बीच खड़ी होती हैं। यात्रियों को कचरे के ढेरों के बीच से होकर ही बसों में चढ़ना और उतरना पड़ता है, जिससे हर समय संक्रमण फैलने का खतरा बना रहता है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां मूलभूत सुविधाओं का पूरी तरह से अभाव है, जो किसी भी सार्वजनिक स्थान के लिए अनिवार्य होती हैं।

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यह भी पढ़ें:  Bhagalpur News: Arvind Kejriwal को मिली राहत से 'आप' में जश्न, प्रदेश अध्यक्ष बोले- 'अब 10 सीटों पर सिमटेगी भाजपा'

कुछ साल पहले यात्रियों की सुविधा के लिए लगाई गई एलईडी सूचना स्क्रीन भी महीनों से बंद पड़ी है। इसके कारण यात्रियों को बसों के आने-जाने की सही समय-सारिणी और उनके मार्गों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है। उन्हें या तो दूसरे यात्रियों से पूछना पड़ता है या फिर कंडक्टरों पर निर्भर रहना पड़ता है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

लाखों के राजस्व के बावजूद बदइंतजामी की तस्वीर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह बस अड्डा सरकार के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। यहां से हर महीने लाखों रुपये की कमाई होती है और प्रतिदिन हजारों की संख्या में यात्री अपने गंतव्य के लिए सफर करते हैं। इसके बावजूद, तिलकामांझी बस अड्डा पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रहा है। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें। बस अड्डे का कार्यालय आज भी अंग्रेजों के जमाने के एक जर्जर भवन में संचालित हो रहा है, जिसकी छत और दीवारें कभी भी गिर सकती हैं और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती हैं।

इस बदहाल व्यवस्था पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए एक स्थानीय नागरिक, राजू कुमार सिंह ने कहा, “यह बहुत ही शर्मनाक है कि स्मार्ट सिटी का बस स्टैंड इतना गंदा और अव्यवस्थित है। इस बदहाल व्यवस्था से पूरे शहर की छवि खराब हो रही है। अधिकारी और प्रशासन इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।” यह स्थिति न केवल यात्रियों के लिए असुविधाजनक है, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1, बल्कि यह शहर के विकास के दावों पर भी एक गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है।

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