Bhagalpur News: गुरुग्राम स्थित स्टारेक्स यूनिवर्सिटी में पीएचडी नामांकन के दौरान कथित धोखाधड़ी का गंभीर मामला सामने आया है। भागलपुर के एक छात्र शशांक रंजन ने विश्वविद्यालय प्रबंधन पर छल का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री को वकालतन नोटिस भेजा है। छात्र का दावा है कि वर्ष 2021 में सत्र 2020-23 के तहत उन्होंने विश्वविद्यालय में पीएचडी में दाखिला लिया था, लेकिन जल्द ही उन्हें आभास हुआ कि पीएचडी प्रक्रिया के नाम पर उनके साथ धोखा किया गया है।
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पीएचडी नामांकन में कथित धोखाधड़ी का आरोप
शशांक रंजन ने बताया कि जब उन्होंने इन कथित अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाई और अपनी आपत्ति दर्ज कराई, तो उन्हें अपना नामांकन रद्द करवाने के लिए मजबूर किया गया। इसके बाद, न्याय की उम्मीद में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। छात्र ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती धोखाधड़ी और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का एक और उदाहरण पेश करती है।

यूजीसी पर भी पक्षपात का आरोप
छात्र शशांक रंजन ने अपनी शिकायत में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के कुछ कर्मचारियों पर भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जांच के दौरान यूजीसी के अधिकारियों ने निष्पक्षता नहीं बरती, जिसके कारण उन्हें न्याय नहीं मिल सका। शशांक का आरोप है कि उनकी शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई न होने से उनके शैक्षणिक सपनों और भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। इस स्थिति ने शिक्षा नियामक संस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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अब अंतिम प्रयास के तहत, छात्र शशांक रंजन ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री को वकालतन नोटिस भेजकर इस मामले में हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की मांग की है। उन्होंने उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की अपील की है। फिलहाल, इस पूरे प्रकरण पर स्टारेक्स यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्र को इंसाफ मिल पाता है या फिर इस मामले को भी दबाने की कोशिश की जाती है, जैसा कि छात्र ने अपने आरोपों में आशंका व्यक्त की है। यह घटना शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है।







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