Bhagalpur Waqf Committee: बिहार की सियासत में आजकल कमेटियों का गठन भी विवादों का अखाड़ा बनता जा रहा है। सत्ताधारी दल के भीतर ही अपनों की अनदेखी का आरोप और गठबंधन धर्म की दुहाई, यही है मौजूदा सियासी तस्वीर।
Bhagalpur Waqf Committee गठन पर मचा घमासान: जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ ने उठाए सवाल
Bhagalpur Waqf Committee गठन से जदयू में उबाल, राजद पर मेहरबानी का आरोप
भागलपुर के नया बाजार स्थित महानगर जनता दल (यूनाइटेड) कार्यालय में नवगठित भागलपुर ज़िला वक़्फ़ कमिटी के गठन को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है। जनता दल (यूनाइटेड) के समर्पित और लंबे समय से कार्यरत अल्पसंख्यक नेताओं को इस कमिटी में दरकिनार कर, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से जुड़े कार्यकर्ताओं को स्थान दिए जाने के विरोध में भागलपुर ज़िला जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ एवं भागलपुर ज़िले से प्रदेश कमिटी से जुड़े अल्पसंख्यक नेताओं ने एक संयुक्त प्रेस वार्ता की। इस दौरान नेताओं ने अपनी गहरी नाराज़गी व्यक्त की।
प्रेस वार्ता के दौरान नेताओं ने वक़्फ़ कमिटी के गठन की पूरी प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि यह न केवल पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के साथ सरासर अन्याय है, बल्कि जनता दल (यूनाइटेड) की घोषित नीतियों और उसकी संगठनात्मक मर्यादाओं का भी खुल्लम-खुल्ला उल्लंघन है। नेताओं ने अपनी बात स्पष्ट करते हुए कहा कि जो कार्यकर्ता वर्षों से अल्पसंख्यक समाज के बीच पार्टी की नीतियों को पहुंचाने और संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का काम कर रहे हैं, उनकी अनदेखी से पूरे समुदाय में गहरा आक्रोश है। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।
जदयू अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों ने मीडिया को बताया कि वक़्फ़ जैसी संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्था में नियुक्तियां करते समय पार्टी निष्ठा, सामाजिक सेवा और अनुभव को सर्वोपरि प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, लेकिन इस मामले में इन महत्वपूर्ण बिंदुओं की पूरी तरह उपेक्षा की गई। उन्होंने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि गठबंधन धर्म के नाम पर जनता दल (यूनाइटेड) के कार्यकर्ताओं के आत्मसम्मान से समझौता किया जा रहा है, जो किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
प्रेस वार्ता में भागलपुर ज़िला एवं महानगर जनता दल (यूनाइटेड) अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के दर्जनों पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित थे। सभी नेताओं में इस गंभीर मुद्दे को लेकर खासा आक्रोश देखा गया। वक्ताओं ने एक स्वर में यह चेतावनी दी कि यदि इस विवादित फैसले पर तुरंत पुनर्विचार नहीं किया गया, तो संगठन स्तर पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी, जिसमें आंदोलन और प्रदर्शन जैसे कड़े कदम भी शामिल हो सकते हैं।
## कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, पार्टी को नुकसान का डर
नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह विरोध किसी भी हाल में पार्टी नेतृत्व के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह गलत निर्णयों और त्रुटिपूर्ण प्रक्रिया के खिलाफ आवाज़ है। उन्होंने प्रदेश नेतृत्व से इस पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और एक न्यायोचित समाधान निकालने की पुरजोर मांग की। आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1। उन्होंने कहा कि पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं को यूं दरकिनार करना उनके मनोबल को तोड़ता है।
प्रेस वार्ता के अंत में सभी नेताओं ने एक स्वर में चेतावनी देते हुए कहा कि अल्पसंख्यक कार्यकर्ताओं की इस तरह लगातार उपेक्षा से पार्टी को ज़मीनी स्तर पर भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, और इस नुकसान की पूरी जिम्मेदारी संबंधित निर्णय लेने वाले अधिकारियों की होगी। देश की हर बड़ी ख़बर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें https://deshajtimes.com/news/national/। यह मुद्दा पार्टी के भीतर एक बड़े संकट का रूप ले सकता है, जिससे आगामी चुनावों में भी कठिनाइयाँ आ सकती हैं, आप पढ़ रहे हैं देशज टाइम्स बिहार का N0.1।

